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वसई, वसई-विरार शहर एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यहां महाराष्ट्र समेत अन्य राज्य से बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। वसई-विरार के उत्तर में वैतरना नदी, दक्षिण में वसई खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर की खाड़ी के अलावा पूर्व में घने जंगलों के बीच बसे तुंगार की ऊंची पहाड़ियों पर विराजमान भगवान भोलेनाथ का तुंगारेश्वर मंदिर तथा जीवदानी मंदिर के कारण यह शहर मशहूर है। लेकिन इन दिनों वसई-विरार शहर का सौंदर्य बारिश ने बिगाड़ दिया है। यहां शहर में हर ओर गड्ढे नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश ने शहर का सौंदर्य बदल दिया है।
३ जुलाई २००९ को वसई-विरार शहर मनपा की स्थापना हुई थी। तब से यहां की हालत जैसी की तैसी है। शहर की सड़कों की मरम्मत को लेकर मनपा की ओर से हर वर्ष करोड़ों का ठेका दिया जाता है, लेकिन स्थानीय सत्ताधारियों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए विकास कार्य हर वर्ष बरसाती पानी में बह जाते हैं।फिलहाल क्षेत्र में सड़कों की हालत ऐसी है कि सड़क कम गड्ढे ज्यादा नजर आ रहे हैं। इन गड्ढों में गिरकर आए दिन बाइक चालक दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा बड़े वाहन चालक भी परेशान हैं, क्योंकि ऐसी सड़कों पर चलने के कारण वाहन ज्यादा खराब हो रहे हैं और उन्हें मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। इस संबंध में शिवसैनिक पंकज देखमुख ने बताया कि वसई-विरार में पिछले २५ वर्ष से लगातार सत्ता पर काबिज लोगों के भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण शहर की सड़कें दे रही हैं। ठेकेदार-इंजीनियर से ज्यादा उम्मीद भी संभव नहीं है। इस क्षेत्र के विकास और सुधार के लिए अब सत्ता परिवर्तन जरूरी है।
वसई-विरार शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ऑनिल अल्मेडा ने बताया कि शहर का सुधार न होना मनपा के मिस मैनेजमेंट का नतीजा है। ठेकेदारों के काम की जांच जरूरी होती है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं देता है। जिसके कारण पैसे खर्च होने के बाद भी समस्या यथावत बनी रहती है। वसई-विरार मनपा के कार्यकारी अभियंता राजेंद्र लाड ने बताया कि बारिश के कारण सड़क में गड्ढे पड़ गए हैं। पानी कम होते ही शहर के गड्ढे बंद करने का कार्य किया जाएगा।


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