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मुंबई, २६ जुलाई को आई बाढ़ की एक वजह बनी मीठी नदी अब लोगों को कई फायदे देनेवाली है। मल्टीपर्पज साबित होनेवाली मीठी नदी के क्लीनअप प्रोजेक्ट से यहां तैरनेवाले कचरे जहां हटेंगे वहीं इसका पानी भी शुद्ध हो जाएगा। आसपास परिसर के सौंदर्यीकरण से मीठी नदी से दुर्गंध की जगह सुगंध पैâलेगी। इतना ही नहीं यहां से निकलनेवाले कचरे के रिसाइकलिंग प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा। एमएमआरडीए ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बीकेसी के पास मीठी नदी में तैरनेवाले कचरों को हटाने और उस कचरे के पुर्नउपयोग की योजना को शुरू किया है। इसका शुभारंभ कल पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने किया है। इस प्रोजेक्ट के चलते जिन कारणों से मीठी नदी २६ जुलाई को उफान पर आई थी उसकी पुनरावृत्ति अब नहीं होगी। बता दें कि एमएमआरडीए ने मीठी नदी की दुर्गंध को मिटाने और उसे खुशबूदार बनाने के लिए पांच कंपनियों से जुड़ी मरीन डेब्रिज कंपनी के साथ बीते वर्ष समझौता किया था। इसी समझौते को अब अमल में लगाया जा रहा है। फिनलैंड रिवर रिसाइकल मशीन का अनावरण शुक्रवार को पर्यटन व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने किया।
बीकेसी के पास मीठी नदी में तैरनेवाले कचरों को हटाने और उस कचरे के पुर्न उपयोग की योजना की शुरुआत की गई है। एमएमआरडीए ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में नदी में तैरनेवाले कचरे को हटाने के लिए वहां उपकरण लगाए हैं। मरीन डेब्रिज कंपनी के साथ बीते वर्ष हुए करार को अब अमल में लाया जा रहा है। यहां से कचरे को हटाकर मीठी नदी का पानी समुद्र में शुद्ध करके छोड़ा जाएगा। इकट्ठा हुए कचरे को अलग-अलग कर प्रक्रिया की जाएगी, जिसके बाद उसका उपयोग पैकेजिंग इंडस्ट्री के लिए किया जाएगा। धारावी से जुड़े कुछ युवकों को इसके लिए मरीन डेब्रिज संस्था की ओर से प्रशिक्षित कर नौकरी दी जाएगी। रोजाना ५ टन कचरा इकट्ठा होने की संभावना है।
वर्ष २००५ में आई भीषण बाढ़ के लिए एक प्रकार से मीठी नदी को भी जिम्मेदार बताया गया था, जिसके बाद से महानगर में मीठी नदी के विकास और साफ-सफाई को लेकर एमएमआरडीए और मनपा विभिन्न परियोजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। मीठी नदी के चौड़ीकरण योजना के साथी इसके दोनों तरफ सुरक्षा दीवार बनाने का काम शुरू है। इतना ही नहीं इसके अगल-बगल अतिक्रमण को भी हटाया गया है।
नदी में तैरते कचरे एवं पानी के बहाव में अड़चन करनेवाली वस्तुओं को तलाशने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। मशीन नदी के बीच जाकर काम करेगी, इसका संचालन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। एमएमआरडीए के अधिकार उक्त काम पर नजर बनाए रखेंगे। एमएमआरडीए के अधिकार में नदी का ६ किलोमीटर का हिस्सा है। ऐसे में ६ किमी तक यह काम होगा।



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