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  राज्य सरकार ने अंततः मुफ्त रिक्शा लाइसेंस नीति पर रोक लगा दी है जो राज्य में रिक्शा चालकों की आजीविका के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई थी। महाराष्ट्र रिक्शा पंचायत के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बाबा कांबले के पिछले चार वर्षों के निरंतर प्रयास और संघर्ष का फल मिला हैऔर इस निर्णय से राज्य के लाखों रिक्शा चालकों को आर्थिक स्थिरता प्राप्त होगी।


इस फैसले का स्वागत करते हुए डॉ. बाबा कांबले ने कहा सरकार की 2017 की खुली लाइसेंसिंग नीति के कारण रिक्शाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड जैसे शहरों में पिछले नौ वर्षों में रिक्शाओं की संख्या छह गुना बढ़ गई है। पिंपरी-चिंचवड में जहां पहले 5000 रिक्शा थे, आज वहां 50000 रिक्शा चल रहे हैं। पुणे में यह संख्या 40000 से बढ़कर 1.5 लाख हो गई है।

पूरे महाराष्ट्र को ध्यान में रखते हुए,

पहले से मौजूद 6 लाख लाइसेंसों में 14 लाख नए लाइसेंस जोड़ दिए गए। इससे रिक्शा व्यवसाय में भारी प्रतिस्पर्धा पैदा हो गई और औसत रिक्शा चालक की आय में कमी आई। डॉ. कांबले ने बताया रोटी के एक टुकड़े में इतने ज्यादा टुकड़े होते थे कि किसी का पेट नहीं भरता था।

महाराष्ट्र रिक्शा पंचायत ऑटो टैक्सी ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया और रिक्शा चालक-मालिक संघ की संयुक्त कार्रवाई समिति की ओर से डॉ. बाबा कांबले ने इस नीति के खिलाफ बार बार विरोध प्रदर्शन किया था और तकनीकी साक्ष्यों के साथ सरकार को ज्ञापन प्रस्तुत किए थे।

हालांकि परिवहन मंत्री ने इस फैसले को लेने में थोड़ी देरी की है लेकिन कहावत है देर से आना कोई बुरी बात नहीं है  फिर भी यह फैसला रिक्शा चालकों के लिए राहत की बात है। इससे रिक्शा व्यवसाय में अनुशासन आएगा और चालकों की आय में वृद्धि होगी। हम इस ऐतिहासिक फैसले के लिए राज्य सरकार के आभारी हैं  डॉ. बाबा कांबले ने कहा।

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