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मुंबई : महाराष्ट्र में रेत खनन और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को अवैध रेत खनन पर नियंत्रण के लिए कई सख्त उपायों की घोषणा की है। कैबिनेट के फैसले के बाद 8 अप्रैल 2025 की रेत नीति में कई महत्वपूर्ण संशोधन शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य 'सैंड माफिया' पर लगाम कसने के लिए विशेष 'फ्लाइंग स्क्वॉड' की तैनाती करना है। नई सरकारी व्यवस्था के तहत तालुका और उप-मंडल स्तर पर विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए जाएंगे, जो अवैध परिवहन पर निगरानी रखेंगे। इन टीमों में राजस्व विभाग और अन्य प्रशासनिक विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।

मंत्री ने बताया कि कोकण क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वहां अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। अब उप-मंडल अधिकारी और तहसीलदार अपने अधिकार क्षेत्र से लगे अन्य तालुका या जिलों में भी कार्रवाई कर सकेंगे। महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड को तटीय और खाड़ी क्षेत्रों में रेत खनन की निगरानी के लिए बढ़ी हुई शक्तियां दी गई हैं। बोर्ड अब खाड़ियों में रेत परिवहन के लिए उपयोग होने वाली सभी नावों का पंजीकरण करेगा, और बिना पंजीकरण या अवैध नावों को जब्त कर तहसीलदारों को कानूनी कार्रवाई के लिए सौंपा जाएगा।

बावनकुले ने बताया कि क्षेत्रीय बंदरगाह अधिकारियों को भी कोकण के जिला और तालुका स्तर की रेत निगरानी समितियों में शामिल किया गया है। सरकार ने रेत नीलामी में भाग लेने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए नए वार्षिक टर्नओवर मानदंड भी तय किए हैं, जो रेत भंडार (ब्रास में) के अनुसार होंगे। इसमें 1000 ब्रास तक के लिए 10 लाख रुपए, 1001 से 2000 ब्रास के लिए 20 लाख रुपए, 5001 से 10,000 ब्रास के लिए 1 करोड़ रुपए, 10,001 से 15,000 ब्रास के लिए 1.5 करोड़ रुपए, 15,001 से 20,000 ब्रास के लिए 2 करोड़ रुपए, 20,001 से 25,000 ब्रास के लिए 3 करोड़ रुपए और 25,000 ब्रास से अधिक के लिए 3.5 करोड़ रुपए का टर्नओवर आवश्यक होगा।

मंत्री के अनुसार, नदियों और खाड़ियों में रेत ब्लॉकों की नीलामी अब ई-ऑक्शन प्रणाली के माध्यम से की जाएगी, जिसे भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जाएगा। नीलामी की अवधि एक वर्ष या रेत भंडार समाप्त होने तक, जो भी पहले हो, निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि सभी समझौतों में एक अनिवार्य प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत यदि किसी अप्रत्याशित स्थिति के कारण खनन नहीं हो पाता है, तो नीलामी धारक को दिया जाने वाला रिफंड बिना ब्याज के होगा। जिला कलेक्टरों को अपने जिलों में क्रियान्वयन समय-सारणी में बदलाव का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसके लिए विभागीय आयुक्त की मंजूरी आवश्यक होगी। यह संशोधित ढांचा पूरे राज्य में लागू होगा, जिसका उद्देश्य रेत खनन उद्योग में अनियमितताओं को समाप्त करना है।

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