मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ में सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा बढ़ाने के लिए लगाए गए 36 कैमरे
मुंबई : महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक अहम सुरक्षा कदम के तहत मुख्यमंत्री का सरकारी आवास ‘वर्षा’ अब सीसीटीवी निगरानी के दायरे में आ गया है। मालाबार हिल स्थित यह बंगला, जहाँ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस निवास करते हैं, अब आधुनिक सुरक्षा कैमरा प्रणाली से लैस किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह राज्य का पहला सरकारी आवास है जिसे इस तरह की व्यापक सीसीटीवी निगरानी प्रणाली से जोड़ा गया है।
इस परियोजना के तहत लगभग 1.25 करोड़ रुपये की लागत से कुल 36 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यह पूरी व्यवस्था राज्य के गृह विभाग के निर्देश और निगरानी में तैयार की गई है, जिसका नेतृत्व स्वयं मुख्यमंत्री फडणवीस के पास है। इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाना बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक महाराष्ट्र में मंत्रालय, विधान भवन और अन्य सरकारी कार्यालयों जैसे प्रमुख प्रशासनिक परिसरों में सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था पहले से मौजूद थी। हालांकि, किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री के निजी सरकारी आवास पर इस तरह की विस्तृत निगरानी प्रणाली पहली बार लागू की गई है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मुख्यमंत्री आवास पर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी सुरक्षा खतरे को समय रहते रोकने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रणाली से पूरे परिसर की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। सूत्रों के अनुसार, इस पहल के बाद अब अन्य मंत्रियों के सरकारी आवासों पर भी इसी तरह की सीसीटीवी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी है।
बताया जा रहा है कि कुछ मंत्री अपने निजी सरकारी आवासों में सीसीटीवी लगाने को लेकर संकोच जता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे उनकी निजी गतिविधियों और आने-जाने वाले लोगों की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण इस योजना को धीरे-धीरे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाते हुए आगे की नीति तय की जाएगी। फिलहाल ‘वर्षा’ बंगले पर यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी गई है और इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए इस तरह की निगरानी प्रणाली भविष्य में अन्य राज्यों में भी अपनाई जा सकती है। इस कदम के बाद मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हो गई है और प्रशासन इसे एक आधुनिक सुरक्षा मॉडल के रूप में देख रहा है।