मुंबई:  पश्चिम रेलवे ने अंधेरी स्टेशन पर एसी लोकल ट्रेन में टिकट जांच को लेकर हुए विवाद मामले में प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। इसमें टिकट जांच कर्मचारियों की ओर से किसी भी तरह की गलती या नियमों के उल्लंघन की बात सामने नहीं आई है। पश्चिम रेलवे के अनुसार, टिकट जांच स्टाफ दोपहर 2:06 बजे विरार स्टेशन से एसी लोकल ट्रेन में सवार हुआ था और वह नियमित रूप से टिकट जांच का काम कर रहा था। जांच के दौरान स्टाफ ने एक यात्री से वैध यात्रा टिकट दिखाने को कहा।

रेलवे के मुताबिक, यात्री ने टिकट की मांग मराठी भाषा में किए जाने की बात कही। यात्री की मांग का सम्मान करते हुए टिकट जांच कर्मचारी ने इसके बाद मराठी में टिकट दिखाने के लिए कहा। हालांकि, इसके बावजूद यात्री लगातार टिप्पणी करता रहा और कर्मचारी से बहस करने लगा, जिससे टिकट जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई और रेलवे कर्मचारी के आधिकारिक कार्य में बाधा पहुंची। स्थिति को देखते हुए और आगे किसी तरह की परेशानी रोकने के लिए यात्री को अंधेरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारा गया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कार्यालय ले जाया गया। पश्चिम रेलवे ने कहा कि टिकट जांच कर्मचारी ने रेलवे अधिनियम, 1989 (जन विश्वास अधिनियम, 2026 के तहत किए गए संशोधनों सहित) और टिकट जांच से जुड़े मौजूदा नियमों और निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की। जांच में कर्मचारी की ओर से किसी भी तरह के दुर्व्यवहार या निर्धारित प्रक्रिया से हटकर काम करने की बात नहीं पाई गई।

पश्चिम रेलवे ने कहा कि वह अपने उन कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ा है, जो ईमानदारी, निष्पक्षता और पेशेवर तरीके से अपनी कानूनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। रेलवे ने यह भी कहा कि देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का वह पूरा सम्मान करता है और यात्रियों से क्षेत्रीय भाषाओं में विनम्र संवाद को प्रोत्साहित करता है। हालांकि, किसी भी रेलवे कर्मचारी को अपनी वैध ड्यूटी करने से रोकना या उसमें बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। पश्चिम रेलवे ने दोहराया कि वह यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगा कि उसके फ्रंटलाइन कर्मचारी बिना किसी दबाव, डर या हस्तक्षेप के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।


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