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मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके साथियों की ज़मानत रद्द कर दी।म्हात्रे को रविवार, 19 जुलाई को शाम 5 बजे तक सरेंडर करने के लिए कहा गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने कल्याण की मजिस्ट्रेट अदालत से म्हात्रे को ज़मानत मिलने के बाद इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। हाई कोर्ट ने निचले कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, क्योंकि उसने मामले की "गंभीरता और आदेश में दिखी खामियों" पर गौर किया।

इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय की गई है।अगर म्हात्रे सरेंडर नहीं करते हैं या नहीं मिलते हैं, तो कोर्ट ने अधिकारियों को उचित प्रक्रिया का पालन करने की छूट दी है, जिसमें उनकी अचल संपत्ति को ज़ब्त करने की कार्रवाई शुरू करना भी शामिल है। शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट के मामले में मुख्य आरोपी हैं। उन्हें 14 जुलाई को कोर्ट ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर ज़मानत दी थी।कोर्ट ने रमेश म्हात्रे की मेडिकल स्थिति पर विचार करने के बाद यह फ़ैसला सुनाया, क्योंकि गिरफ़्तारी के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।रमेश म्हात्रे के वकील, एमके काज़ी ने कहा कि उन्होंने अभियोजन पक्ष की आपत्तियों का जवाब दिया और दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने शिवसेना नेता को ज़मानत दे दी। यह मामला 6 जुलाई को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है, जिससे मेडिकल जगत में भारी आक्रोश फैल गया था। म्हात्रे को डोंबिवली के विष्णु नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के सिलसिले में धारा 132 और 121(1) के तहत गिरफ़्तार किया गया था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

 

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