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मुंबई : क्राइम ब्रांच ने 3 साल पहले के चर्चित संदीप गडोली फर्जी एनकाउंटर केस में मुख्य साजिशकर्ता वीरेंद्र कुमार उर्फ बिंदर गुज्जर को गुरुग्राम के पास भौंसी इलाके से गिरफ्तार किया है। सीनियर इंस्पेक्टर सुनील माने ने बुधवार को बताया कि हमने उसे मुंबई की किला कोर्ट में रिमांड के लिए पेश किया। कोर्ट ने उसे 30 अक्टूबर तक क्राइम ब्रांच कस्टडी में भेज दिया। क्राइम ब्रांच इस केस में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें पांच पुलिस कर्मी हैं और दो महिलाएं भी हैं। इनमें से एक दिव्या पाहूजा को गडोली की गर्लफ्रेंड बनाकर उसके साथ मुंबई भेजा गया था। सीनियर इंस्पेक्टर सागर शिवलकर ने तब दिव्या की मां सोनिया को भी गिरफ्तार किया था।

क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, 7 फरवरी, 2016 को जब संदीप गडोली अंधेरी के एक होटल में फर्जी एनकाउंटर में मारा गया था, तब बिंदर गुज्जर हरियाणा की जेल में बंद था। लेकिन जेल में बंद रहकर भी उसने अपने भाई मनोज गुज्जर व गुडगांव के कुछ पुलिस कर्मियों की मदद से इस फर्जी एनकाउंटर की साजिश रची। मनोज अभी भी इस केस में वॉन्टेड है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, संदीप गडोली पहले बिंदर के अंडर में काम करता था। दोनों की जेल में दोस्ती हुई थी। दोनों उगाही लेने, किसी की प्रॉपर्टी पर जबरन कब्जा करने और सट्टा खेलने का काम करते थे। बाद में दोनों में किसी बात पर विवाद हुआ, तो दोनों ने अपना स्वतंत्र गिरोह बना लिया। इसके बाद दोनों एक दूसरे गैंग के लोगों को मरवाने लगे। इनमें इनके खुद के परिवार के लोगों की भी हत्याएं हुईं।

इसके बाद, आरोप है कि बिंदर ने जेल में रहकर संदीप गडोली को खत्म करने की साजिश रची। बिंदर ने अपने भाई मनोज को जेल में बुलवाया। मनोज ने फिर गुरुगाम पुलिस के कुछ लोगों की मदद ली। बाद में इस साजिश में दिव्या आहूजा को उसकी गर्लफ्रेंड बनाया गया। दिव्या संदीप गडोली के साथ वहां से निकली। वह फेसबुक पर अपना लोकेशन डालती रहती थी। साथ ही अपनी मां सोनिया को भी फोन करती रहती थी। सोनिया मनोज को कॉल करती थी। मनोज गुरुगाम के पुलिस सब-इंस्पेक्टर प्रद्युम्न को कॉल करता था। प्रद्युम्न उसी हिसाब से संदीप गडोली का पीछा करता रहता था। यही पीछा करते- करते गुरुगाम की पुलिस टीम अंधेरी के एक होटल में आ धमकी, जहां गडोली दिव्या के साथ ठहरा हुआ था। आरोप है कि वहां ही गडोली को फरवरी, 2016 में फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया गया। जब इस एनकाउंटर पर सवाल उठे, तो तब के क्राइम ब्रांच चीफ अतुलचंद कुलकर्णी ने एसआईटी बनाई। उसी एसआईटी ने इस केस में हरियाणा पुलिस के तमाम कर्मियों को आरोपी बनाया और पांच पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया।


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