मुंबई : मनपा का ईको फ्रेंडली शव दहन सिस्टम
मुंबई : कोरोना काल में मनपा ने शव दहन को लेकर एक नया तरीका ढूंढ लिया है. मनपा ने ईको फ्रेंडली शव दहन सिस्टम को सायन हिंदू श्मशान भूमि में स्थापित किया. इस नए शव दहन की हिंदू रीति रिवाज के साथ- साथ लकड़ी और समय दोनों की बचत होती है.
मनपा ने सायन स्थित श्मशान भूमि में एक ऐसी ट्राली बनाई है जिस पर परंपरागत रूप से लाश को जलाए जाने में जितनी लकड़ियों का खर्च होती है, उससे आधी लकड़ी का उपयोग इस विधि में होता है. मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मंगला गोमरे ने कहा कि आमतौर पर एक शव को जलाने के लिए 300 से 400 किलो लकड़ी लग जाती है, जबकि नए ईको फ्रेंडली अंत्येष्टि सिस्टम के जरिए शव को जलाने के लिए महज 100 से 150 किलो लकड़ी का उपयोग ही होता है. नए सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह कि हिन्दू रीति रिवाज के साथ शव का दाह संस्कार हो जाता है.आमतौर पर स्थाई ट्राली पर शव को रखा जाता है, लेकिन नए सिस्टम में ट्राली में पहिये लगे हैं, जिस पर लाश को लेटा कर सभी रीति रिवाज करने और मुखाग्नि देने के बाद उसे बंद फर्नेस में डाला जाता है.
पारंपरिक प्रकिया में शव को जलने में करीब 4 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन नए प्रक्रिया के तहत महज डेढ़ घंटे में शव जल जाता है. इलेक्ट्रिक और पीएनजी में लोगों को रीति रिवाज अनुसार शव दहन करने को नहीं मिलता है, लेकिन नई प्रक्रिया के तहत मृतक के परिजन कपाल क्रिया और पंच समिधा भी कर सकते हैं. यानी रीति रिवाज में किसी भी तरह का समझौता नहीं करना होगा.
ईको फ्रेंडली अंत्येष्टि प्रक्रिया पर्यावरण के काफी अनुकूल है. लकड़ी की कम लागत, जलने के समय कार्बन डाइऑक्साइड भी नाम मात्र उत्सर्जित होता है. यानी वायु और जल प्रदूषण भी कम होता है. ईको फ्रेंडली अंत्येष्टि सिस्टम को बनानी वाली एमएस ऊर्जा गैसीफायर कंपनी ने मनपा को इस प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए नेपाल में आने का निवेदन किया. मनपा के अधिकारी और इंजीनियर ने पोखारा, नेपाल में जाकर श्मशान में पूरी प्रक्रिया देखी. उसके बाद यह निर्णय लिया गया. 3 और श्मशान भूमि में यह ईको फ्रेंडली अंत्येष्टि सिस्टम स्थापित किया जाएगा.