कोरोना महामारी के बीच देश में आंख की जानलेवा बीमारी, काले-पीले फंगस का जानलेवा खतरा
मुंबई : कोरोना महामारी के बीच देश में आंख की जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ता जा रहा है। ब्लैक के बाद व्हाइट और अब येलो फंगस ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषकर उत्तर प्रदेश में काले-पीले का जानलेवा खतरा बढ़ गया है। नेत्र विशेषज्ञ येलो फंगस को ज्यादा घातक बता रहे हैं। इंजेक्शन और दवाइयों के अभाव में फंगस के शुरू भंकस से डॉक्टर भी हैरान हैं। देश के कई हिस्सों में ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस से संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। येलो फंगस का पहला मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पाया गया है। मरीज की उम्र ३४ वर्ष है। वह कोरोना संक्रमित रह चुका है और शुगर का मरीज भी है। हर्ष ईएनटी अस्पताल गाजियाबाद में मिले इस मरीज के अंदर तीनों लक्षण पाए गए हैं। वहां के डॉक्टर ब्रिजपाल त्यागी का कहना है कि उन्होंने अपनी केस स्टडी में ऐसे लक्षण का मरीज आज तक नहीं देखा है। जिले में ब्लैक, व्हाइट के बाद येलो फंगस मिला है। गोरखपुर में ब्लैक फंगस के साथ वाइट फंगस के मरीज भी मिले हैं। जिले के बीआरडी अस्पताल में व्हाइट संघर्ष के लक्षणवाले ३ मरीजों का इलाज कोविड वार्ड में चल रहा है। गोरखपुर में ब्लैक फंगस के ४० मरीज मिले हैं। आगरा में तो इलाज करा रही एक महिला की ब्लैक फंगस से मौत हो गई है। मिथलेश शर्मा नामक यह महिला फिरोजाबाद के प्रतापपुर गांव की रहनेवाली थी। इसी तरह बिजनौर में अपर जिला जज राजू प्रसाद की ब्लैक फंगस से मृत्यु हो गई। वे कोरोना से ठीक हो गए थे। यूपी के अलावा हरियाणा में भी ब्लैक फंगस के ४२१ मामले सामने आए हैं जबकि गुरुग्राम में सबसे ज्यादा १४९ मरीज मिले हैं। जम्मू और कश्मीर में तो ब्लैक फंगस को अधिसूचित बीमारी तक घोषित कर दिया गया है।
महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के ८५० मरीज पाए गए हैं। इस बीमारी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। इसके लिए २ लाख इंजेक्शन की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने इसके लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्र सरकार से ब्लैक फंगस प्रतिरोधक इंजेक्शन की आपूर्ति करने की मांग की गई है। इसके अलावा साराभाई कंपनी से राज्य में इंजेक्शन का उत्पादन करने के लिए कच्चा माल लेने की बातचीत हुई है। कंपनी ने २ किलो कच्चा माल देने की हामी भरी है। एक किलो कच्चा माल से २० हजार इंजेक्शन तैयार होते हैं।