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मुंबई : मुंबई महानगरपालिका चुनाव के बीच डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मुंबई में बड़ा झटका लगा है. गोरेगांव में 200 से ज्यादा पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. बताया जाता है कि उम्मीदवारी और पद वितरण को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है. जिस कारण इस्तीफे का यह फैसला लिया गया है. मुंबई के गोरेगांव और दिंडोशी इलाके में पार्टी के विभाग प्रमुख समेत 200 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है.  बताया जा रहा है कि शिंदे गुट के 35 से 40 पदाधिकारियों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की ठान ली है और नामांकन वापस लेने से मना कर दिया है. विवाद की जड़ प्रभाग क्रमांक 54 है, जो शिंदे गुट के पास था लेकिन उसे बीजेपी को सौंप दिया गया. 

पार्टी ने हमारी मेहनत को किया नजरअंदाजः कार्यकर्ता

नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सीटों के बंटवारे के दौरान उनके साथ अन्याय हुआ है. गोरेगांव के पुराने और निष्ठावान शिवसैनिक इस बात से नाराज हैं कि पार्टी ने उनकी मेहनत को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को तरजीह दी है. विशेष रूप से, प्रभाग क्रमांक 54 जो शिंदे गुट के पास था, उसे बीजेपी को सौंपे जाने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में तीव्र आक्रोश है. 

निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं ने उनकी भावनाओं और निष्ठा पर ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा. नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन इतनी बड़ी संख्या में इस्तीफों ने महायुति की चिंता बढ़ा दी है. शिंदे गुट के इन बागी पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे न केवल अपने पदों से हट रहे हैं, बल्कि कई जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हैं. 

शिवसेना यूबीटी का दावा- सत्ता का दुरुपयोग

इस इस्तीफे के साथ ही विपक्षी दलों ने हमला तेज कर दिया है. शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया है कि सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी उम्मीदवारों पर नाम वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि शिंदे गुट अपने ही घर (संगठन) को संभालने में नाकाम साबित हो रहा है.


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