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मुंबई : राज्य भर में बढ़ता गैर-कानूनी पैसेंजर ट्रांसपोर्ट पब्लिक सेफ्टी के लिए एक गंभीर मुद्दा बन गया है और इससे लीगल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी बड़ा झटका लग रहा है। बिना लाइसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस या नियमों के मुताबिक परमिशन के पैसेंजर ले जाने वाली गाड़ियां एक्सीडेंट का खतरा बढ़ा रही हैं और पैसेंजर की जान को खतरे में डाल रही हैं। 

ऐसे गैर-कानूनी पैसेंजर ट्रांसपोर्ट को रोकने के लिए ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने निर्देश दिया है कि 1 मार्च से पूरे राज्य में एक असरदार कैंपेन चलाया जाए। प्रताप सरनाइक ने यह निर्देश मोटर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को दिए। वे इस बारे में विधान भवन में बुलाई गई मीटिंग में बोल रहे थे। 

मिनिस्टर सरनाइक ने कहा कि ओवरलोडिंग, गाड़ियों की रेगुलर जांच न करने और सेफ्टी नियमों को नजरअंदाज करने जैसे कारणों से एक्सीडेंट की संख्या बढ़ जाती है। अगर ऐसी गाड़ियों का वैलिड इंश्योरेंस नहीं है, तो एक्सीडेंट के बाद पैसेंजर को मुआवजा मिलना मुश्किल हो जाता है। कई बार गाड़ी के मालिक या ड्राइवर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं, जिससे पीड़ितों को इंसाफ मिलने में देरी होती है।

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