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नागपुर : राज्य सरकार ने अब उन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है जो खाने के पैकेट पर आकर्षक शब्द और तस्वीरें छापकर ग्राहकों को गुमराह करती हैं। अगर पैकेट पर दिखाई गई सामग्री और पैकेट में मौजूद असली सामग्री में कोई अंतर पाया गया तो संबंधित कंपनियों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। खाद्य और औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल। कंपनियों का ग्राहकों की सेहत के साथ खेल खाने के नाम पर कंपनियों द्वारा खेला जाने वाला इस तरह का खेल सिर्फ मुनाफे के लिए ग्राहकों की सेहत के साथ खेल है। इसे 'फूड मार्केटिंग फ्रॉड' भी कहा जा सकता है। 'हेल्दी' के नाम पर वे चीनी की भरमार, खतरनाक प्रिजर्वेटिव और रंग, सस्ता तेल, गुमराह करने वाली लेबलिंग वगैरह का इस्तेमाल करती हैं।

'मिसब्रांडेड फूड' क्या है? 

ऐसा खाने का सामान जिसके बारे में ग्राहकों को गलत जानकारी दी जाती है या गुमराह किया जाता है। जब कोई बनाने वाला पैकेज पर कुछ और कहता है और असल में उसमें कुछ और होता है, तो उसे 'मिसब्रांडेड फूड' माना जाता है। अगर कोई प्रोडक्ट 'मिसब्रांडेड' पाया जाता है, तो फूड सेफ्टी एक्ट के तहत मैन्युफैक्चरर पर 3 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कंज्यूमर्स को फूड प्रोडक्ट्स के बारे में गुमराह किया जा रहा है फूड मार्केटिंग अक्सर कंज्यूमर्स को अट्रैक्ट करने के लिए 'स्मार्ट' लेकिन गुमराह करने वाले तरीकों का इस्तेमाल करती है। प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर जो दिखता है और असल में जो होता है, उसमें बहुत बड़ा अंतर होता है। इससे कंज्यूमर को धोखा मिलता है।

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