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पुणे : कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही पत्नी को कोर्ट से राहत मिली है। पति को आदेश दिया गया है कि वह अपनी पत्नी को रोज़ाना के खर्चों के लिए हर महीने 30,000 रुपये गुजारा भत्ता दे। पुणे के कोर्ट जस्टिस आर.एन. खान ने हाल ही में यह आदेश दिया है।

इस मामले में, पति-पत्नी को वैचारिक मतभेदों और पारिवारिक झगड़ों के कारण अलग रहना पड़ा। इसके बाद पत्नी ने गुजारा भत्ता के लिए अर्जी दी थी। कोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया था कि वह अभी कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही है और उसकी कोई अलग से इनकम नहीं है। उसने मांग की थी कि पति को फाइनेंशियल मदद देने का निर्देश दिया जाए क्योंकि रहने का खर्च, पढ़ाई का सामान, फीस और दूसरे रोज़ाना के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। उसने अर्जी में यह भी बताया था कि उसे ज़रूरी खर्चों के लिए अपने पति से पूरी मदद नहीं मिल रही थी। पत्नी ने यह अर्जी एडवोकेट सोनाली अरु-नवास्कर, एडवोकेट प्राची जमदाड़े-कोल्हे, एडवोकेट अजय मोहल और दीपाली अडसुल के ज़रिए दायर की थी।

दोनों पक्षों की दलीलों और डॉक्यूमेंट्स को देखने के बाद, कोर्ट ने पति की इनकम, पत्नी की पढ़ाई और पैसे की ज़रूरतों और उसकी फाइनेंशियल हालत को ध्यान में रखते हुए हर महीने 30,000 रुपये का मेंटेनेंस देने की मंज़ूरी दी। कोर्ट ने कहा कि यह रकम पत्नी की पढ़ाई समेत बेसिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़रूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस ऑर्डर को तुरंत लागू किया जाए।

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