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मुंबई : दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मराठी साइनबोर्ड लगाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुंबई के डिप्टी मेयर संजय घाडीने शहर की सभी दुकानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक महीने के भीतर मराठी साइनबोर्ड लगाने का निर्देश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने पर “शिवसेना-स्टाइल” में कार्रवाई की जाएगी। संजय घाडी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल सामान्य दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फाइव-स्टार होटल, बड़े ब्रांड आउटलेट और सेलिब्रिटी से जुड़े प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। उनके अनुसार, सभी व्यावसायिक इकाइयों को तय समयसीमा के भीतर देवनागरी लिपि में मराठी साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य होगा।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार देवनागरी लिपि में मराठी भाषा का उपयोग साइनबोर्ड पर होना जरूरी है, और इसका पालन सभी प्रतिष्ठानों को करना चाहिए। घाडी ने कहा कि यह केवल कानूनी अनुपालन का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की भाषा और पहचान से जुड़ा मुद्दा भी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक महीने के भीतर दुकानदार और होटल मालिक मराठी साइनबोर्ड नहीं लगाते हैं, तो उनके संगठन के कार्यकर्ता कार्रवाई करेंगे। इस संदर्भ में उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे का नाम लेते हुए कहा कि उनके निर्देशों के अनुसार संगठन “शिवसेना-स्टाइल” में जवाब देगा।

इस बयान के बाद शहर के व्यापारिक वर्ग और होटल उद्योग में हलचल देखी जा रही है। कई व्यापारियों का कहना है कि वे पहले से ही सरकारी नियमों का पालन करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अचानक सख्त चेतावनी से चिंता बढ़ गई है। वहीं कुछ संगठनों का मानना है कि भाषा संबंधी नियमों का पालन किया जाना चाहिए, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और प्रशासनिक होनी चाहिए। मुंबई में पहले भी साइनबोर्ड की भाषा को लेकर समय-समय पर विवाद होते रहे हैं। मराठी भाषा को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच अक्सर अलग-अलग राय देखने को मिलती है। इस बार भी बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरम होता नजर आ रहा है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, ताकि व्यापारियों और प्रशासन के बीच किसी तरह का टकराव न हो। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि एक महीने की दी गई समयसीमा के भीतर कितने प्रतिष्ठान मराठी साइनबोर्ड लगाते हैं और आगे इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन की क्या भूमिका रहती है।

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