नवी मुंबई की फोटोकॉपी दुकान में फॉर्म मिलने के बाद पांच बीएलओ निलंबित
नवी मुंबई : नवी मुंबई के खारघर इलाके में एक फोटोकॉपी की दुकान से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े 3,400 गणना प्रपत्र बरामद होने के बाद पांच बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को निलंबित कर दिया गया। इस घटना के बाद शिवसेना (उबाठा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प भी हुई। पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, शिवसेना (उबाठा) कार्यकर्ताओं ने खारघर स्थित एक दुकान पर एक व्यक्ति को पकड़ा, जिसके बारे में उनका दावा है कि वह भाजपा की युवा इकाई का पदाधिकारी है। आरोप है कि वह दुकान में एसआईआर प्रपत्र फोटोकॉपी करा रहा था।
पनवेल से भाजपा के एक नेता ने हालांकि कहा कि इस मामले से पार्टी कार्यकर्ताओं का कोई लेना-देना नहीं है।
बृहस्पतिवार को इस विवाद से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद प्रशासन ने इस बात की जांच शुरू की कि मतदाताओं द्वारा भरे गए प्रपत्र निजी फोटोकॉपी केंद्र तक कैसे पहुंचे। स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और भाजपा के कथित पदाधिकारी को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने मौके से हजारों मुद्रित एसआईआर प्रपत्र जब्त कर थाने पहुंचाए।
इस बीच, शिवसेना (उबाठा) कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिया गया भाजपा का युवा नेता पूछताछ के कुछ ही देर बाद खारघर पुलिस थाने से भागने में सफल रहा। रायगढ़ के जिलाधिकारी किशन जावले ने शुक्रवार को बताया कि सूरज पाटिल नामक व्यक्ति के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पनवेल विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से जुड़े ये फॉर्म दुकान में मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने पनवेल के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) पवन चांडक के कार्यालय का दौरा किया। उन्होंने बताया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी होने तक इन पांचों बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को निलंबित कर दिया गया है।
शिवसेना (उबाठा) के पदाधिकारी बालेश भोजने ने सवाल उठाया कि आम मतदाताओं द्वारा भरे गए एसआईआर फॉर्म निजी व्यक्तियों तक कैसे पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना में भाजपा की युवा इकाई के पदाधिकारी सीधे तौर पर शामिल हैं। दूसरी ओर, पनवेल महानगरपालिका के महापौर और भाजपा नेता नितिन पाटिल ने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
इस बीच, विपक्षी राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि केवल बीएलओ का निलंबन काफी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने एसआईआर प्रक्रिया के संचालन के तरीके की पोल खोल दी है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे कई अन्य मामले भी हो सकते हैं जो अभी सामने नहीं आए हैं, इसलिए निर्वाचन आयोग को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।