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मुंबई : मुंबई पुलिस के एंटी-टेररिज्म सेल ने गुप्त सूचना के आधार पर पालघर जिले के नालासोपारा ईस्ट इलाके में कार्रवाई करते हुए सात संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों में एक पुरुष, चार महिलाएं और दो छोटे बच्चे शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि ये सभी बांग्लादेशी नागरिक हो सकते हैं और कथित तौर पर बिना जरूरी आधिकारिक अनुमति के भारत में दाखिल हुए थे। फिलहाल पुलिस उनकी पहचान और भारत में प्रवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। 

यह कार्रवाई गुरुवार को की गई। जुहू पुलिस के एंटी-टेररिज्म सेल को इलाके में संदिग्ध लोगों के रहने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने नालासोपारा ईस्ट के मोरेगांव इलाके में कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने मोरेगांव तालाब के पास स्थित जय जीवदानी चाल में तड़के करीब 1 बजे छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस टीम को एक कमरे या परिसर में कुल सात लोग मिले। इनमें एक पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे बताए गए हैं। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती पूछताछ और उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुलिस को संदेह हुआ कि ये लोग बांग्लादेश के नागरिक हैं।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि समूह के पास भारत में रहने या प्रवेश से संबंधित जरूरी आधिकारिक अनुमति के दस्तावेज नहीं थे। हालांकि उनकी नागरिकता और भारत में प्रवेश की परिस्थितियों की पुष्टि के लिए दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसलिए फिलहाल पुलिस की ओर से इन्हें संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक बताया गया है। मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये लोग भारत में कब और किस रास्ते से दाखिल हुए। इसके साथ ही नालासोपारा में वे कितने समय से रह रहे थे और यहां रहने के लिए उन्होंने किस तरह की व्यवस्था की थी, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में पहचान से जुड़े दस्तावेजों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखती हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हिरासत में लिए गए लोगों के पास कोई पहचान पत्र, यात्रा दस्तावेज या अन्य कागजात मौजूद हैं या नहीं। यदि कोई दस्तावेज मिलता है तो उसकी वास्तविकता की भी जांच की जा सकती है। छापेमारी के दौरान दो छोटे बच्चों की मौजूदगी भी सामने आई है। बच्चों की उम्र और उनके माता-पिता या अभिभावकों से संबंधित जानकारी पुलिस जुटा रही है। बच्चों के मामले में उनकी सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नालासोपारा और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और यहां अलग-अलग राज्यों तथा क्षेत्रों से आने वाले लोग भी निवास करते हैं। ऐसे में पुलिस समय-समय पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर जांच और सत्यापन की कार्रवाई करती है। इस मामले में भी गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने पहले जानकारी जुटाई और फिर तड़के छापेमारी की। एंटी-टेररिज्म सेल की कार्रवाई होने के कारण मामले की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जांच की जा रही है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी तक यह सामने नहीं आया है कि हिरासत में लिए गए सात लोगों का किसी आतंकी गतिविधि या संगठन से संबंध है। फिलहाल कार्रवाई का मुख्य आधार उनकी संदिग्ध नागरिकता और कथित तौर पर बिना अनुमति भारत में प्रवेश करने से जुड़ा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में समूह के बांग्लादेशी नागरिक होने के संकेत मिले हैं। अब पुलिस उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। इसके साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि उन्होंने भारत में प्रवेश करने के बाद किन स्थानों पर निवास किया और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि उन्हें नालासोपारा में रहने की जगह किसने उपलब्ध कराई थी। यदि जांच में किसी स्थानीय व्यक्ति या अन्य नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जय जीवदानी चाल में हुई यह छापेमारी रात के समय की गई। करीब 1 बजे पुलिस टीम के पहुंचने के बाद इलाके में हलचल मच गई। टीम ने बताए गए स्थान को घेरकर वहां मौजूद लोगों की पहचान और पूछताछ की। इसके बाद सातों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। मामले की जांच में उनके मोबाइल फोन और संपर्कों की भी पड़ताल की जा सकती है। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वे किन लोगों के संपर्क में थे और नालासोपारा में उनके रहने की व्यवस्था कैसे हुई। यदि किसी तरह के संदिग्ध दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड सामने आते हैं तो उनकी भी जांच की जाएगी। भारत में किसी विदेशी नागरिक का प्रवेश और निवास निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। ऐसे में बिना वैध दस्तावेज या अनुमति के प्रवेश और रहने के आरोप गंभीर माने जाते हैं। पुलिस को यह तय करने से पहले संबंधित लोगों की नागरिकता और दस्तावेजों की पुष्टि करनी होगी कि उनके खिलाफ किस तरह की कानूनी कार्रवाई लागू होती है। इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद अब जांच का अगला चरण उनकी पहचान की पुष्टि और भारत में प्रवेश से जुड़े तथ्यों को स्थापित करना होगा। यदि वे वास्तव में बांग्लादेशी नागरिक पाए जाते हैं और उनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिलते हैं तो कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस यह भी जांच करेगी कि समूह में शामिल सभी लोग एक-दूसरे से किस रिश्ते में हैं। पुरुष और चार महिलाओं के साथ दो बच्चों का एक ही स्थान पर रहना सामने आया है। बच्चों के संबंध में परिवार और अभिभावक की जानकारी जुटाना भी जांच का हिस्सा होगा। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में जुहू पुलिस के एंटी-टेररिज्म सेल की टीम ने स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद छापेमारी की। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में संदिग्धों के बांग्लादेशी नागरिक होने के संकेत मिले हैं। हालांकि अंतिम पुष्टि दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस सातों संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि वे भारत में कब आए, किस रास्ते से दाखिल हुए, नालासोपारा में कब से रह रहे थे और उनके पास भारत में रहने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। 

कुल मिलाकर नालासोपारा ईस्ट में मोरेगांव तालाब के पास जय जीवदानी चाल में हुई तड़के की कार्रवाई में सात संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए हैं। इनमें एक पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में उनके बांग्लादेशी नागरिक होने और बिना आधिकारिक अनुमति भारत में प्रवेश करने के संकेत मिले हैं। फिलहाल उनकी पहचान, दस्तावेजों और भारत में प्रवेश से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। 


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