नौकरी के नाम पर 10 लाख की ठगी
ठाणे : महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक प्रतियोगी परीक्षा अकादमी में शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि शिक्षक ने एक ऑटो-रिक्शा चालक के बच्चों को महाराष्ट्र पुलिस और भारतीय नौसेना में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे 10 लाख रुपये से अधिक की रकम ले ली। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतकर्ता भिवंडी का रहने वाला 46 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक है। उसकी बेटी कल्याण रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक प्रतियोगी परीक्षा अकादमी में पुलिस भर्ती के लिए प्री-रिक्रूटमेंट प्रशिक्षण ले रही थी। इसी दौरान अकादमी के एक शिक्षक से उसका संपर्क हुआ।
आरोप है कि शिक्षक ने पहले शिकायतकर्ता की बेटी की नौकरी को लेकर भरोसा कायम किया। उसने कथित तौर पर परिवार को बताया कि वह महाराष्ट्र पुलिस में उसकी बेटी की नौकरी लगवा सकता है। इसके साथ ही उसने शिकायतकर्ता के बेटे को भारतीय नौसेना में प्रवेश स्तर की नौकरी दिलाने का भी दावा किया। पुलिस के अनुसार, शिक्षक ने दोनों बच्चों के भविष्य और सरकारी नौकरी की उम्मीद का भरोसा दिलाकर परिवार से संपर्क बनाए रखा। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने अपने दावों के जरिए परिवार का विश्वास हासिल कर लिया था। इसके बाद नौकरी लगवाने के नाम पर उससे रकम ली गई।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने परिवार से कुल 10,30,000 रुपये लिए। परिवार को उम्मीद थी कि रकम देने के बाद उनकी बेटी को महाराष्ट्र पुलिस में और बेटे को भारतीय नौसेना में नौकरी मिल जाएगी। हालांकि बाद में उन्हें कथित तौर पर ठगी का एहसास हुआ। मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया और अकादमी के शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से किस तरीके से संपर्क किया और नौकरी दिलाने के लिए किस तरह का भरोसा दिया था। पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपी ने इससे पहले किसी अन्य व्यक्ति से भी इसी तरह रकम ली थी या नहीं। प्रतियोगी परीक्षा अकादमियां आम तौर पर सरकारी और अन्य नौकरियों की तैयारी कराने के लिए जानी जाती हैं। ऐसे संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थी और उनके परिवार नौकरी को लेकर शिक्षकों और संस्थान से जुड़े लोगों पर भरोसा करते हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर नौकरी दिलाने का दावा करने वाले लोगों द्वारा ठगी की आशंका बनी रहती है।
इस मामले में भी आरोपी शिक्षक का अकादमी से जुड़ा होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिकायतकर्ता की बेटी उसी अकादमी में महाराष्ट्र पुलिस की भर्ती के लिए प्रशिक्षण ले रही थी। ऐसे में शिक्षक को भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा की जानकारी रखने वाला व्यक्ति समझकर परिवार ने उस पर भरोसा किया हो सकता है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरोपी ने नौकरी दिलाने के नाम पर रकम किस माध्यम से ली। यदि बैंक खाते, ऑनलाइन ट्रांसफर या अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान किया गया है तो संबंधित लेनदेन की जानकारी जांच में अहम साबित हो सकती है। इसके अलावा पुलिस आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत, फोन कॉल और संदेशों की भी जांच कर सकती है। यदि नौकरी दिलाने के वादे से संबंधित कोई बातचीत या दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है। सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को अक्सर दलालों या फर्जी नियुक्ति कराने का दावा करने वाले लोगों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है और किसी व्यक्ति को पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा संदेह पैदा करने वाला हो सकता है। इस मामले में शिकायतकर्ता की बेटी महाराष्ट्र पुलिस में नौकरी की तैयारी कर रही थी। आरोपी ने कथित तौर पर इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। साथ ही शिकायतकर्ता के बेटे को भारतीय नौसेना में प्रवेश स्तर का पद दिलाने की बात कही गई।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता के परिवार का विश्वास हासिल करने के बाद उनसे 10,30,000 रुपये लिए। अब जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि रकम लेने के बाद आरोपी ने परिवार को क्या आश्वासन दिया और नौकरी से संबंधित कोई प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की या नहीं। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर सकती है कि आरोपी के पास किसी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में प्रभाव डालने की वास्तविक क्षमता थी या उसने केवल परिवार को विश्वास में लेने के लिए ऐसा दावा किया था। यदि आरोपी ने जानबूझकर झूठी जानकारी देकर रकम ली है तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। शिकायतकर्ता के लिए यह रकम काफी बड़ी बताई जा रही है। एक ऑटो-रिक्शा चालक के परिवार ने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने और सरकारी नौकरी की उम्मीद में रकम दी थी। नौकरी नहीं मिलने और रकम वापस न मिलने की स्थिति में परिवार ने पुलिस का रुख किया। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पक्षों से जानकारी जुटा रही है। अकादमी में आरोपी की भूमिका, वहां उसका पद और शिकायतकर्ता की बेटी से उसके संपर्क की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि क्या आरोपी अकेले इस तरह की गतिविधि कर रहा था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। यदि पुलिस को अन्य लोगों की भूमिका के संकेत मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में आरोपी अक्सर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को सरकारी विभागों में संपर्क होने या भर्ती प्रक्रिया में मदद करने का दावा करते हैं। इसके बाद उनसे फीस, दस्तावेज या नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम मांगी जाती है। ऐसे मामलों में जब नौकरी नहीं मिलती तो पीड़ितों को ठगी का पता चलता है। हालांकि इस मामले में पुलिस की जांच अभी शुरुआती चरण में है। आरोपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस शिकायतकर्ता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि आरोपी प्रतियोगी परीक्षा अकादमी में शिक्षक था। इससे उसे अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के बीच भरोसा बनाने में मदद मिली होगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या उसने अकादमी से जुड़े अन्य विद्यार्थियों या उनके परिजनों को भी नौकरी दिलाने का प्रस्ताव दिया था। यदि जांच में ऐसे अन्य मामलों का पता चलता है तो पुलिस उन पीड़ितों के बयान भी दर्ज कर सकती है। इससे कथित नेटवर्क या आरोपी की कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिल सकती है। पुलिस के सामने अब रकम की वसूली और आरोपी की भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाना भी चुनौती होगी। यदि पैसे बैंकिंग माध्यम से दिए गए हैं तो लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकता है। वहीं नकद भुगतान की स्थिति में अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। परिवार ने नौकरी की उम्मीद में जो रकम दी थी, उसके स्रोत की भी जांच प्रक्रिया में जानकारी ली जा सकती है। पुलिस यह समझने की कोशिश करेगी कि भुगतान कब-कब किया गया और कुल 10.30 लाख रुपये किस तरह आरोपी तक पहुंचे। इस घटना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और उनके परिजनों के लिए भी सबक सामने आता है। किसी भी सरकारी नौकरी में चयन निर्धारित परीक्षा और आधिकारिक प्रक्रिया के तहत होता है। इसलिए नौकरी पक्की कराने या भर्ती में सीधे मदद करने के नाम पर बड़ी रकम मांगने वालों से सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी शिक्षक की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रकम किस उद्देश्य से ली गई और आरोपी ने कथित तौर पर परिवार को किस तरह अपने विश्वास में लिया। कुल मिलाकर, ठाणे जिले के भिवंडी निवासी 46 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक से महाराष्ट्र पुलिस और भारतीय नौसेना में बच्चों को नौकरी दिलाने का वादा कर 10.30 लाख रुपये लेने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता की बेटी कल्याण रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक प्रतियोगी परीक्षा अकादमी में महाराष्ट्र पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही थी। आरोप है कि अकादमी के एक शिक्षक ने उसकी बेटी को पुलिस में नौकरी और बेटे को भारतीय नौसेना में प्रवेश स्तर का पद दिलाने का भरोसा देकर परिवार से रकम ली। पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस आरोपी के दावों, रकम के लेनदेन और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है।