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नागपुर। मरीजों को आकर्षित करने के लिए इलाज की गारंटी, भ्रामक  विज्ञापन और बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों का सहारा लेने वाले डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (ईएमआरबी) ने चिकित्सा पेशे में नैतिक विज्ञापन और सार्वजनिक संचार को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य मरीजों को गलत जानकारी और अनुचित प्रलोभनों से बचाना तथा चिकित्सा सेवाओं के प्रचार में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

6 अक्टूबर 2026 को जारी दिशानिर्देशों में डिजिटल माध्यमों पर किए जाने वाले प्रचार, इलाज के दावों, डॉक्टरों की रेटिंग और मरीजों को आकर्षित करने के तरीकों से जुड़े नियम स्पष्ट किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर चेतावनी से लेकर आर्थिक दंड और पंजीकरण निलंबित करने तक की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

नागपुर में भी क्लीनिक, निजी अस्पताल और सुपर स्पेशालिटी केंद्र अपनी सेवाओं की जानकारी देने के लिए वेबसाइट, सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जानकारी का तथ्यात्मक, सत्यापित और पारदर्शी होना महत्वपूर्ण है। इलाज की 100% गारंटी, फर्जी रेटिंग और प्रलोभनों पर रोक नए दिशानिर्देशों में इलाज के परिणामों को लेकर अप्रमाणित दावे करना, खुद को बिना प्रमाण ‘सबसे बेहतर’ या नंबर-1 डॉक्टर बताना, मरीजों की प्रशंसात्मक टिप्पणियों का प्रचार में इस्तेमाल करना और फर्जी रेटिंग दिखाना प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल हैं। मरीजों को छूट, मुफ्त सुविधाओं या अन्य प्रलोभनों के जरिए आकर्षित करने पर भी नियम लागू होंगे। सोशल मीडिया, वेबसाइट, प्रायोजित पोस्ट और अन्य डिजिटल माध्यमों से किए जाने वाले प्रचार को भी इनके दायरे में रखा गया है।


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