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मुंबई.  महाराष्ट्र के अहमनगर जिले के श्रीरामपुर गांव के किसान रमेश आसने ने लगातार हो रही बरसात और खराब होती खेती के चलते ऐसा कदम उठाया जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. भारी बरसात से आसने की सोयाबीन की खेती पूरी तरह से नष्ट हो गई, कर्ज लेकर और ढेरी सारी मेहनत कर आसने ने सोयाबीन की खेती की पर कुदरत के कहर के सामने उनकी एक न चली. आसने के खेत, पानी भर जाने से पूरी तरह से नष्ट हो गए. आखिरकार हार मान कर आसने ने अपने खेत जला दिए. वहीं एक और पीड़ित किसान का कहना है कि इस साल कपास और सोयाबीन की खेती की, बरसात से खराब हो गई अब तक सरकार का गठन नहीं हो पाने से कोई मदद नहीं मिल पा रही है. अब तक अहमदनगर जिले में नुकसान का पंचनामा भी नहीं हुआ है. ऐसे में हमारे (किसानों) पास और कोई चारा भी तो नहीं है.

नवाब मलिक कहते हैं की किसानों का मसीहा बताते हुए हर नेता ने जोरो शोरो से अपना प्रचार किया, कर्ज माफी के नाम पर बीजेपी-शिवसेना सरकार ने भी खूब वाहवाही लूट ली, अब परेशान किसानों की हालत देख एनसीपी ने भी बीजेपी-शिवसेना पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. बीजेपी और शिवसेना में पदों को लेकर होने वाली खींचतान की वजह से किसानों को मदद ना मिलने का दावा विपक्ष कर रहा है. बीजेपी के साथ मुख्यमंत्री पद के लिए संघर्ष कर रही शिवसेना, दावा कर रही है कि वो किसानों का हौसला बढ़ाएगी. शिवसेना नेता सचिन आहिर कहते हैं कि हम राज्यपाल से मिले इतना ही नहीं खुद उद्धवजी किसानों से मिलने के लिए वैजापूर और कन्नड़ का दौरा करेंगे तो आदित्य ठाकरे कोकन के किसानों से मिलने जा रहे हैं. नेता अब चाहे जो दावे करे लें पर सच्चाई यही है कि डूबती हुई फसल को देखकर किसानों के आंसू पोछने और उनको मदद पहुंचने का काम अब तक नहीं हुआ है.


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