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मुंबई : गैस उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी दिनोदिन बढ़ती जा रही है. कभी उनके साथ सिलेंडर बुक कराने के बाद पुराने बिल को रद्द कर नई दर के बिल के साथ अधिक राशि वसूली जाती है, तो कभी उनके नाम की सब्सिडी पर ही डाका डाला जाता है. कई ग्राहक व्यस्तता के चलते यह जांच नहीं कर पाते कि उनके एकाउंट में सब्सिडी जमा हुई भी है कि नहीं. इसी का फायदा आज डीलर और डिलीवरी ब्वायज उठा रहे हैं. डिलीवरी ब्वाय से सिलेंडर की रसीद की मांग किए जाने के बाद वे टालमटोल करते हैं और रसीद कार्यालय में छूटने का बहाना करते हैं. सिलेंडर पर पैसा कमाने के चक्कर में वे सब्सिडी वाला सिलेंडर अन्य किसी ग्राहक को थमा रहे हैं. इस तरह की धोखाधड़ी उन ग्राहकों के साथ बहुत अधिक हो रही है, जो कि आनलाइन बुकिंग करते हैं और डिलीवरी ब्वाय उन्हें रसीद की बजाय केवल सिलेंडर ही सौंपते हैं.

एक ग्राहक ने बताया कि उसने एजेंसी के नंबर पर आनलाइन सिलेंडर बुक कराया. इसमें सिलेंडर की डिलीवरी तो की गई, लेकिन सिलेंडर पहुंचाने वाले ने रसीद नहीं दी. रसीद भी नहीं मिली और न ही बैंक खाते में सब्सिडी जमा हुई. इस तरह से डिलीवरी ब्वाय सब्सिडी वाले सिलेंडर और किसी को थमा रहे हैं. 1 वर्ष में 12 सिलेंडर की सीमा तय है. इसमें कई लोग वर्षभर में 7 से 8 सिलेंडर का ही उपयोग कर पाते हैं. बाकी उसके नाम से बचे 4 सिलेंडर की सब्सिडी और किसी ग्राहक को थमाकर गड़बड़ घोटाला किया जा रहा है. कई ग्राहक इससे अनजान रहने के कारण वे धोखा खाते आ रहे हैं और डीलर के साथ डिलीवरी ब्वायज मालामाल हो रहे हैं. इसमें कई बार सिलेंडर धारकों को सब्सिडी जमा होने का कोई अलर्ट मैसेज भी नहीं आता. इसी का फायदा उठाकर धड़ल्ले से ग्राहकों को निशाना बनाया जा रहा है. जब भी कोई उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुक कराएं, तो डिलीवरी ब्वायज से रसीद लेना न भूलें. रसीद देने के बाद ही सिलेंडर लें.

कम्पनियों द्वारा हर माह सिलेंडरों की दरें बढ़ाई जा रही हैं. इसमें उपभोक्ताओं के साथ सबसे अधिक धोखाधड़ी दरें बढ़ाने के बाद बिल कैंसल कराने को लेकर हो रही हैं. इसमें कम्पनी से लेकर डीलर तक की मिलीभगत शुरू है. पुराने की जगह नये दर वाले बिल से ग्राहकों को फटका लगाते हुए डीलर्स लाखों की कमाई कर रहे हैं. बुक करने के बाद कितने सिलेंडरों की बुकिंग रद्द की गई इसकी उच्चस्तरीय जांच केंद्र सरकार द्वारा करने की मांग नागरिकों द्वारा की गई है. ग्राहकों के साथ मचाई जा रही लूट को देखते हुए 25 से 30 तारीख तक सभी डीलरों का आडिट किया जाना चाहिए. इससे एजेंसियों और कम्पनी द्वारा उपभोक्ताओं के साथ की जा रही लूट पर विराम लगेगा.


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