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मुंबई : हॉर्न न बजाने को लेकर कई अभियान चलाए जाते हैं, मगर उनका कोई असर नहीं होता। सिग्नल पर खड़े लोग उसके खुलने तक हॉर्न बजा-बजाकर परेशान कर लेते हैं। यही देखकर मुंबई पुलिस ने नया तरीका निकाला है। शहर के पांच ट्रैफिक सिग्नलों पर डेसिबल मीटर लगाए गए हैं और इसे ट्रैफिक सिग्नल के साथ जोड़ा गया है। इस सिस्टम को इस तरह बनाया गया है कि जैसे ही डेसिबल मीटर 85 डेसिबल के पार जाएगा, सिग्नल का टाइमर रीसेट हो जाएगा। इस तरह आप जितना ज्यादा हॉर्न बजाएंगे, उतना ज्यादा इंतजार करेंगे। इस प्रयोग का एक विडियो मुंबई पुलिस ने ट्विटर पर जारी किया है। जिसे खूब पसंद किया जा रहा है। इस ट्वीट को अब तक 15 हजार रीट्वीट और 40 हजार लाइक मिल चुके हैं। मुंबई पुलिस का यह आइडिया बेंगलुरु सिटी पुलिस के कमिश्नर भास्कर राव को भी काफी पसंद आया। उन्होंने लिखा, 'डेसिबल मीटर लगाने का यह आइडिया बेहद अच्छा है। हम भी इसे लागू करेंगे।'मुंबई पुलिस के जेसीपी (ट्रैफिक) मधुकर पांडेय ने कहा, 'नवंबर और दिसंबर में कुछ घंटों के लिए हमने इसका ट्रायल लिया था। सीएसटी, मरीन ड्राइव, पेडर रोड, हिंदमाता और बांद्रा टर्नर रोड पर इन डेसिबल मीटर्स को लगाया गया था।' उन्होंने माना कि ऐसा करने से दूसरी सड़कों पर दबाव बढ़ेगा, मगर उसे एक्स्ट्रा फोर्स लगाकर मैनेज कर लिया जाएगा।

हालांकि ट्रैफिक एक्सपर्ट हुसैन इंदौरवाला ने इस प्रयोग को लेकर शंका जाहिर की। उन्होंने कहा कि बेहद मुश्किल है कि यह प्रयोग लोगों की आदत बदल पाए। ड्राइवर जल्द ही समझ जाएंगे कि उन्हें कहां हॉर्न बजाना है और कहां नहीं। उन्होंने कहा, 'मुंबई पुलिस लक्षण का इलाज कर रही है, न कि बीमारी का। भारत की सड़कों पर कार चलाना बहुत तनाव भरा काम है और लोगों को ऐसे बर्ताव के लिए मजबूर करता है। ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लाकर इस परेशानी को कम किया जा सकता था।


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