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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर जैसे जैसे दिन बीत रहा है, वैसे ही संकट बढ़ता जा रहा हैं. जिसको लेकर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने गुहार लगाई हैं. मिली जानकरी के अनुसार मंगलवार को ठाकरे ने फोन कर प्रधानमंत्री मोदी से बात की हैं, जिसमे उन्होंने विधान परिषद की सीट पर राज्य के अंदर हो रही राजनीति पर अपना विरोध भी जताया और साथ में उनका समर्थन भी माँगा हैं.

जानकरी के अनुसार प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान ठाकरे ने कहा, “राज्य मंत्रिमंडल के सभी सदस्य प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना के खिलाफ खड़े हैं. राज्य बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा हैं. संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं जिसको कम करने के काम केंद्र और राज्य सरकार के सामने खड़ा हैं.” 

उन्होंने कहा, ”  विधान परिषद के होने वाले चुनाव को केंद्रीय आयोग ने आगे बढ़ा दिया हैं जिसके कारण राज्य में संवैधानिक मुश्किल खड़ी नहीं होने के लिए मेरा नाम विधान परिषद में सदस्य के रूप में नामित करने के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया हैं. लेकिन इसपर जिस तरह से राजनीति शुरू हैं वह राज्य और प्रशासन के लिए ठीक नहीं हैं.”

उद्धव ने कहा, ” यह समय राजनीति करने का नहीं, हमारे ऊपर आए इस संकट से लड़ने का है. बल्कि मतभेद बाजू में रख कर लोगो की मदद करने का है. लेकिन दुर्भाग्य से तो स्थिति महाराष्ट्र में दिख रही हैं वह चिंता का विषय हैं.” 

बतादें कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्तमान समय में दोनों सदनों के सदस्य नहीं हैं. जिसको लेकर महाविकास अघाड़ी ने राज्यपाल के कोटे से उन्हें विधान परिषद सदस्य नामित करने के लिए दो बार उनका नाम राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के पास भेजा हैं. जिसपर राजभवन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया हैं. इसी के कारण उद्धव की कुर्सी मुश्किल में पड़ गई हैं.  

शिवसेना प्रमुख द्वारा इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को फोन किए जाने पर शिवसेना और भाजपा के नेताओं ने बोलने से इनकार कर दिया हैं. वहीं शिवसेना नेता और उद्धव सरकार में परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा, ” कोरोना विषय पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री की लगातार बात होती हैं. प्रधानमंत्री ने चार बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बात की हैं. जिसका तुरंत ऐसा अर्थ निकलना योग्य नहीं हैं. 

संवैधानिक नियम के अनुसार ठाकरे को मुख्यमंत्री की शपथ लेने के छह महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना अनिवार्य हैं. जो 28 मई को पूरा होने वाला हैं. अगर इस दौरान वह दोनों सदनों में से  किसी एक के सदस्य नहीं बनते है तो उन्हें मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ेगा। 

उद्धव ठाकरे के सामने इस समय अपनी कुर्सी बचने के लिए सिर्फ दो ही विकल्प बचा है, पहला तो वो खुद इस्तीफ़ा देकर पुनः मुख्यमंत्री की शपथ ले, इससे उन्हें और छह महीने का समय मिल जायेगा। लेकिन उनके इस्तीफ़ा को पुरे सरकार का इस्तीफ़ा माना जाएगा। जिसके कारण पुरे मंत्रिमंडल को पुनः शपथ दिलानी पड़ेगी। दूसरा ये की राज्यपाल अपने कोटे की सात सीट में से किसी एक पर उन्हें विधान परिषद का सदस्य नामित करे. 


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