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कुवैत सरकार देश में काम करने वाले प्रवासी नागरिकों की संख्या कम करना चाह रही है, इसके लिए एक कानून का मसौदा तैयार किया गया है। इस कानून का सबसे बड़ा असर भारतीय नागरिकों पर हो सकता है। कुवैत में अभी करीब 10 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं।
हालांकि, इस कानून का असर कुवैत में काम करने वाले सभी देशों के नागरिकों पर होगा, लेकिन सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक प्रभावित होंगे, क्योंकि प्रवासियों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही है। अगर यह कानून पारित हो गया तो संभावना है कि तीन से चार लाख प्रवासी भारतीयों को देश छोड़ना पड़ सकता है।

    कुवैत की समस्या

देश की कुल आबादी में 70 फीसदी प्रवासी हैं

    धीरे-धीरे बड़ी संख्या में प्रवासियों को अपनी तरफ आकर्षित करते करते कुवैत एक प्रवासी-बहुल देश बन गया है। देश की कुल 48 लाख आबादी में सिर्फ 30% कुवैती और 70% प्रवासी हैं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों की वजह से अब वहां प्रवासी-विरोधी भावनाएं गहरा रही हैं, जिसकी वजह से सरकार को इस समस्या पर ध्यान देना पड़ा।
    कुवैत सरकार ने लक्ष्य बनाया है कि आबादी में प्रवासियों की संख्या को 70% से कम कर के 30% पर लाना है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार प्रस्तावित कानून में देश की आबादी में प्रवासी भारतीयों की संख्या घटाकर आबादी का 15% करने की बात की गई है।
    अगर यह कानून लागू हो गया तो सिर्फ लगभग सात लाख प्रवासी भारतीयों को ही कुवैत में रहने की अनुमति मिल पाएगी और कम से कम तीन से चार लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ेगा।
    स्थानीय मीडिया में कहा जा रहा है कि करीब आठ लाख भारतीयों को देश छोड़ना पड़ सकता है। इस कानून को अभी तक कुवैती संसद की दो महत्वपूर्ण समितियों से स्वीकृति मिल चुकी है और एक और समिति से स्वीकृति मिलना बाकी है।


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