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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार की बहुचर्चित और सबसे बड़ी परियोजनाओं में गिने जाने वाले समृद्धि महामार्ग की असलियत एक बार फिर सामने आ गई है। उद्घाटन के महज तीन साल के भीतर ही यह एक्सप्रेसवे यातायात प्रतिबंध की चपेट में आ गया है। इस महामार्ग पर मेंटेनेंस के प्रति घोर लापरवाही बरती जा रही है। यही वजह है कि सुरक्षा और तकनीकी अपडेट के नाम पर ९ से १८ फरवरी तक समृद्धि महामार्ग पर आंशिक यातायात ठप कर दिया गया है।

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल के अनुसार, इस दौरान हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत अपडेट सुरक्षा उपकरण और ट्रैफिक नियंत्रण प्रणाली लगाई जाएगी। प्रशासन का दावा है कि इससे भविष्य में यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा मिलेगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी लागत से बने महामार्ग को तीन साल में ही सुधार की जरूरत क्यों पड़ गई?

सरकार ने समृद्धि महामार्ग को आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुरक्षा का प्रतीक बताकर प्रचारित किया था। फिर भी बार-बार हादसे, तकनीकी खामियां और अब यातायात प्रतिबंध यह साबित कर रहे हैं कि योजना और क्रियान्वयन में गंभीर चूक हुई है। यातायात प्रतिबंध के चलते हजारों वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेने की सलाह दी गई है, जिससे आम यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सुविधा बनी बोझ

जानकारों की माने तो जनता की सुविधा के नाम पर बनाई गई सड़क अब जनता के लिए ही बोझ बनती जा रही है। समृद्धि महामार्ग सरकारी विज्ञापनों में जितना ‘स्मार्ट’ दिखाया गया, जमीनी हकीकत उतनी ही कमजोर साबित हो रही है। बार-बार मरम्मत, तकनीकी बदलाव और यातायात रोकना इस बात का संकेत है कि परियोजना को जल्दबाजी में और बिना ठोस तैयारी के शुरू किया गया।

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