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मुंबई : 17 साल के इंतज़ार के बाद अब कुर्ला से परेल के बीच 5वीं और 6वीं रेलवे लाइन परियोजना आगे बढ़ने को तैयार है। क्योंकि इस परियोजना में सबसे बड़ी बाधा बन रही धारावी, चुनाभट्टी और कुर्ला के स्वदेशी मिल की जगह अब आखिरकार हटाई जाएगी। मिली जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट प्रभावित लोगों के ढांचों को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इससे सीएसएमटी और कुर्ला के बीच लाइन एक्सटेंशन को गति मिलेगी। एमएमआरडीए ने 717 पात्र PAP परिवारों का पुनर्वास पूरा कर लिया है और उन्हें वैकल्पिक घर आवंटित किए जा चुके हैं। वर्तमान में इन परिवारों का स्थानांतरण जारी है। 

20 जनवरी को CR ने पूरी की भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया

मध्य रेलवे ने स्वदेशी मिल, कुर्ला और विद्याविहार क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 20 जनवरी 2026 को ही पूरी कर ली थी।ध्वस्तीकरण के लिए मशीनरी, कर्मचारी और अन्य आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था अंतिम चरण में है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रेलवे सुरक्षा बल, सरकारी रेलवे पुलिस और मुंबई पुलिस के ज़ोन-5 को तैनाती के लिए अनुरोध किया गया है। अधिकारी के अनुसार, ध्वस्तीकरण कार्य एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

सायन ब्रिज के निर्माण के बाद ही शुरू होगा मुख्य काम

ध्वस्तीकरण के बाद निर्माण कार्य को गति दी जाएगी, हालांकि सायन ब्रिज जैसे कुछ मौजूदा कार्यों के पूरा होने के बाद ही मुख्य निर्माण शुरू होगा। खास बात यह है कि प्रस्तावित प्रभादेवी ब्रिज के डिजाइन में पहले से ही 5वीं और 6वीं लाइनों के लिए प्रावधान शामिल कर लिए गए हैं, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। 

17 साल पहले मिली थी मंजूरी

यह परियोजना मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत करीब 17 वर्ष पहले स्वीकृत की गई थी। इसका उद्देश्य मुंबई के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में उपनगरीय ट्रेनों को लंबी दूरी की मेल/एक्सप्रेस और मालगाड़ियों से अलग करना है। परियोजना पूरी होने के बाद नई 5वीं और 6वीं लाइनें केवल मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के लिए उपयोग होंगी, जबकि मौजूदा 3री और 4थी लाइनें पूरी तरह उपनगरीय सेवाओं के लिए समर्पित होंगी। 

परेल - CSMT के बीच केवल 5वी लाइन संभव

CSMT से परेल के बीच छठी लाइन बनाना संभव नहीं है। लाइन बिछाने के लिए लगने वाली 'जमीन' रेलवे के लिए रोड़ा बनी हुई है। हालांकि पांचवी लाइन का निर्माण किया जाएगा। संबंधित अधिकारी का कहना है कि वर्तमान में प्लानिंग का काम जारी है, जिसमे पाया गया है कि सीएसएमटी और परेल के बीच जगह की कमी होने के कारण, यह प्रोजेक्ट रेलवे के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

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