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मुंबई : सरकार ने मुंबई महानगर क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित भयंदर-घोड़बंदर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात दबाव को कम करना और यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। यह परियोजना मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के परिवहन ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है। इस परियोजना में दो प्रमुख घटक शामिल हैं। पहला, भयंदर से फाउंटेन होटल जंक्शन तक एक एलिवेटेड क्रीक ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। दूसरा, फाउंटेन होटल जंक्शन से गाइमुख तक एक ट्विन-ट्यूब अंडरग्राउंड टनल बनाई जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹17,036.03 करोड़ बताई गई है।

प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 15.44 किलोमीटर होगी और इसे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत “बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर” मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इस मॉडल के तहत निजी भागीदार निर्माण और संचालन में शामिल रहेंगे, जबकि निर्धारित अवधि के बाद परियोजना सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएगी। सरकारी आदेश के अनुसार, कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद शहरी विकास विभाग ने 22 जून को इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी दी। इससे पहले इस परियोजना से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद यह मामला कानूनी विवादों में भी फंस गया था।

जानकारी के अनुसार, लगभग दो साल पहले मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी  ने इस प्रोजेक्ट की पुरानी टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। इसके बाद लार्सन एंड टुब्रो ने इस फैसले को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। दोनों अदालतों ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी  के फैसले को सही ठहराया, जिसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। इस परियोजना को मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भयंदर और घोड़बंदर क्षेत्र के बीच रोजाना भारी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं, जिससे मौजूदा सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है।

एलिवेटेड क्रीक ब्रिज और अंडरग्राउंड टनल के बनने से यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, यह परियोजना औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना आधुनिक तकनीक और इंजीनियरिंग का उपयोग करके बनाई जाएगी, ताकि इसे लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनाया जा सके। परियोजना के पूरा होने के बाद यह मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण ट्रैफिक कॉरिडोर में से एक बन सकती है।

सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। साथ ही, इससे आसपास के इलाकों में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में इस तरह की बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाएं भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बेहद जरूरी हैं, क्योंकि लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या से मौजूदा ढांचा दबाव में है। फिलहाल, परियोजना के विस्तृत डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही इसके टेंडर और निर्माण कार्य से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

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