मुंबई : मजास बस डिपो में छत का प्लास्टर गिरा, तीन मैकेनिक घायल
मुंबई: जोगेश्वरी स्थित मजास बस डिपो में गुरुवार सुबह एक हादसा हो गया। यहां स्टोर रूम-कम-रेस्ट रूम की छत का प्लास्टर अचानक गिरने से बेस्ट के लिए वेट-लीज पर बसें संचालित करने वाली कंपनी ‘मातेश्वरी अर्बन ट्रांसपोर्ट’ के तीन मैकेनिक घायल हो गए। घटना के बाद डिपो में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, हादसा सुबह करीब 6:45 बजे हुआ। उस समय कंपनी के इंजीनियरिंग विभाग के मैकेनिक अपने काम में लगे हुए थे। अचानक कमरे की छत का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में वहां मौजूद तीन कर्मचारी आ गए।
हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद कर्मचारियों ने घायल मैकेनिकों की मदद की और उन्हें इलाज के लिए जोगेश्वरी स्थित ट्रॉमा केयर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तीनों घायलों का प्राथमिक उपचार किया। जांच के बाद जब उनकी हालत स्थिर पाई गई तो अस्पताल प्रशासन ने उन्हें छुट्टी दे दी। घटना में किसी कर्मचारी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन इस हादसे ने बस डिपो के पुराने ढांचे और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने मांग की है कि डिपो परिसर में मौजूद इमारतों और सुविधाओं की नियमित जांच कराई जाए।
माजास बस डिपो में यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब बेस्ट और उसके निजी वेट-लीज ऑपरेटरों के डिपो में कर्मचारियों की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा होती रही है। वेट-लीज मॉडल के तहत निजी कंपनियां बेस्ट के लिए बसों का संचालन करती हैं और उनके कर्मचारी डिपो में रखरखाव समेत अन्य काम करते हैं। घटना के बाद डिपो परिसर में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों की ओर से यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े स्थानों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भवनों और अन्य ढांचागत सुविधाओं की समय-समय पर जांच जरूरी है। खासकर पुराने भवनों में जर्जर हिस्सों की पहचान कर उनकी मरम्मत कराना बेहद महत्वपूर्ण है। कर्मचारियों का कहना है कि स्टोर रूम और रेस्ट रूम जैसी जगहों का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में लोग करते हैं। ऐसे स्थानों की स्थिति बेहतर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।
हादसे के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या डिपो परिसर में मौजूद इमारतों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जा रहा है या नहीं। यदि समय रहते कमजोर हिस्सों की पहचान कर ली जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। परिवहन अधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर संबंधित हिस्से की मरम्मत कराई जाएगी। बेस्ट और निजी वेट-लीज ऑपरेटरों के लिए यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना जरूरी है। बसों के संचालन के साथ-साथ डिपो की इमारतों और सुविधाओं का रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल तीनों घायल मैकेनिक सुरक्षित हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़े बुनियादी ढांचे की स्थिति और नियमित रखरखाव की जरूरत को सामने ला दिया है।