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मुंबई। मुंबई के देओनार में एक सेवानिवृत्त कॉलेज प्रिंसिपल से साइबर स्कैमर ने चुनाव आयोग का अधिकारी बनकर 17 लाख रुपये की ठगी कर ली। स्कैमर ने खुद को चुनाव अधिकारी बताते हुए पीड़ित को ऑनलाइन फार्म भरने को कहा। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन अपडेट करने के बहाने एक एपीके फाइल डाउनलोड करने को कहा, स्कैमर ने पीड़ित को चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो वे अगले चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे।

पीड़ित ने जैसे ही एपीके फाइल डाउनलोड की, स्कैमर ने मोबाइल का रिमोट एक्सेस ले लिया। यह स्पेशल इंटेंसिव रिविजन  स्कैम का पहला मामला है जिसमें एपीके फाइल का इस्तेमाल करके मोबाइल डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल किया गया और डेटा चुराया गया।

पीड़ित रिटायर्ड प्रिसिपल को 8 अगस्त को हुए पांच फर्जी ट्रांजैक्शन का पता चला, जिसके बाद उन्होंने 10 अगस्त को ईस्ट रीजन साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत की। पुलिस ने 10 अगस्त को तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआयआर दर्ज की।

5 रुपये ट्रांसफर कराने के बहाने निकाला 17 लाख

साइबर पुलिस के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन  फॉर्म की फीस के नाम पर महज 5 रुपये ट्रांसफर करने का झांसा दिया। जैसे ही उन्होंने भेजे गए लिंक से 'ऑनलाइन वोटर वेरिफिकेशन' और 'डिवाइस प्रोटेक्शन' नाम की फर्जी एपीके फाइलें डाउनलोड कीं, जालसाजों ने उनके मोबाइल फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया। इसके बाद उनके खातों से 5 किस्तों में 17 लाख रुपये एक प्राइवेट और दो सरकारी बैंकों के खातों में ट्रांसफर कर लिए गए।

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