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मुंबई: पंतनगर पुलिस ने घाटकोपर स्थित एक कंपनी के मालिक के खिलाफ कथित धोखाधड़ी और नकली बैंक गारंटी जमा करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि अमेरिका को चीनी निर्यात का कोटा हासिल करने के लिए आरोपी ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के समक्ष करीब 6.43 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी पेश की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिकी में आरोपी की पहचान घाटकोपर ईस्ट की 90 फीट रोड स्थित ‘मेक इंडिया इम्पेक्स’ के मालिक राजेश तुलसीदास नखुआ के रूप में हुई है। शिकायत के मुताबिक, उनकी कंपनी को अमेरिका में 8,584 मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने का कोटा मिला था। हालांकि, कंपनी निर्धारित मात्रा में चीनी का निर्यात नहीं कर सकी। इसी प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण  के सामने एक ऐसी बैंक गारंटी पेश की गई, जिसे जांच में फर्जी बताया गया है।

मामला कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण  के अधिकारी की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता 53 वर्षीय प्रशांत प्रमोद वाघमारे कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और नवी मुंबई के वाशी स्थित कार्यालय में तैनात हैं। उन्होंने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण  की ओर से जारी अथॉरिटी लेटर के आधार पर पंतनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, अमेरिका को चीनी निर्यात के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कंपनी की ओर से बैंक गारंटी प्रस्तुत की गई थी। यह गारंटी करीब 6.43 करोड़ रुपये की बताई गई है। आरोप है कि दस्तावेज की सत्यता की जांच के दौरान उसमें गड़बड़ी सामने आई और बैंक गारंटी को कथित तौर पर फर्जी पाया गया।

पुलिस के सामने दर्ज शिकायत में कहा गया है कि कथित फर्जी बैंक गारंटी के जरिए सरकारी प्रक्रिया का लाभ लेने और निर्यात कोटे से जुड़ी शर्तों को पूरा करने का प्रयास किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस कृत्य से सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई और चीनी निर्यात की निर्धारित प्रक्रिया प्रभावित हुई। अमेरिका को चीनी निर्यात से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब भारत से चीनी के निर्यात पर केंद्र सरकार की नीतियों और निर्धारित कोटे के तहत कड़ी निगरानी रहती है। ऐसे मामलों में निर्यातकों को संबंधित शर्तों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। बैंक गारंटी भी इसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। 

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