मुंबई: ₹6.5 लाख करोड़ के निवेश से महाराष्ट्र बनेगा परमाणु ऊर्जा हब 1.23 लाख नौकरियों की उम्मीद
मुंबई: परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। राज्य में करीब ₹6.5 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से 25,400 मेगावाट परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन परियोजनाओं से लगभग 1,23,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, अदाणी पावर और ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, ये अभी प्रस्तावित निवेश हैं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन के साथ वास्तविक क्षमता तथा रोजगार के आंकड़े स्पष्ट होंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य के ऊर्जा मंत्री भी हैं और इस महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की निगरानी कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार की योजना राज्य को भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्रों में बदलने की है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी एनपीसीआईएल तकनीकी विशेषज्ञता और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के अनुभव के साथ इस मिशन में राज्य की सहायता कर रहा है।
इस योजना का उद्देश्य महाराष्ट्र की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में स्वच्छ स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाना है। उद्योगों, महानगरों, डेटा केंद्रों और नई आधारभूत संरचना परियोजनाओं के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है। परमाणु ऊर्जा को चौबीसों घंटे बिजली देने वाले कम कार्बन ऊर्जा स्रोत के रूप में देखा जाता है। इससे राज्य को कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर अपनी निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।
महाराष्ट्र का परमाणु ऊर्जा से संबंध नया नहीं है। देश के पहले वाणिज्यिक परमाणु बिजली स्टेशन की शुरुआत राज्य के तारापुर में हुई थी। मुंबई से करीब 140 किलोमीटर दूर अरब सागर के तट पर स्थित तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन ने भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा की नींव रखी। यह क्षेत्र पहले ठाणे जिले का हिस्सा था लेकिन अब पालघर जिले में आता है। तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन में चार रिएक्टर हैं। इसकी इकाई एक और दो बॉइलिंग वॉटर रिएक्टर यानी बीडब्ल्यूआर हैं। दोनों इकाइयों ने 28 अक्टूबर 1969 को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया था और प्रत्येक की मौजूदा क्षमता 160 मेगावाट है। तारापुर की तीसरी और चौथी इकाइयां प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर यानी पीएचडब्ल्यूआर हैं और प्रत्येक की क्षमता 540 मेगावाट है। तीसरी इकाई अगस्त 2006 और चौथी इकाई सितंबर 2005 में वाणिज्यिक संचालन में आई थी। इस प्रकार तारापुर स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 1,400 मेगावाट है।