नई दिल्ली: देश में तीन जगह स्लीपर बसों में लगी आग... छत पर लगेज और नियमों की अनदेखी के बीच धड़ल्ले से दौड़ रही हैं बसें
नई दिल्ली: पिछले साल राजस्थान समेत देश के अन्य कई इलाकों में स्लीपर बसों में आग लगने से 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और इनके मंत्रालय द्वारा मैराथन एक्सरसाइज करते हुए एक सितंबर से नया बस बॉडी कोड लागू किया गया था। जिसे सुरक्षा का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बताया गया था। लेकिन उन नियमों का हुआ क्या? यमुना एक्सप्रेसवे समेत देश में एक ही दिन में बसों में आग लगने के तीन अलग-अलग मामले सामने आए। जिसमें ग्रेटर नोएडा इलाके में यमुना एक्सप्रेसवे पर आग का गोला बनी स्लीपर बस में नौ यात्रियों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और हैदराबाद में श्रीशैलम जा रही चलती बस में आग लगी। इन दोनों घटनाओं में गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई।
इस बस की छत पर भी लगेज भरा हुआ था। जो की नियमों के अनुसार नहीं होना चाहिए था।
इस की फिटनेस कब हुई थी और असल में यह कैसी थी। यह सब जांच के बाद ही पता लग सकेगा।
एक्सपर्ट का कहना है कि नियम तो बना दिए जाते हैं, लेकिन उन पर सख्ती से अमल नहीं हो पा
रहा। यही वजह है कि कितने ही बस ऑपरेटर्स नियमों को ताक पर रखते हुए बसों को दौड़ा
रहे हैं। इस बस की छत पर भी सामान भरा हुआ था। जो की नियमों के तहत नहीं होना चाहिए
था। स्लीपर बसों की छतों पर लगेज भरकर यह बसें दिल्ली से यूपी और हरियाणा होते हुए
आगे जाती हैं। लेकिन बीच रास्ते में इन्हें ना तो कहीं ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी
रोकते हैं आर ना ही ट्रैफिक पुलिस। नियम तोड़ती यह बसें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मामले में एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि असल में बीएस-6 बसों में आग लगने की घटना
अधिक हो रही हैं। इसके पीछे का कारण इन बसों में इलेक्ट्रिकल फेलियर लग रहा है। जिसकी
ऑडिट करने में ना तो सड़क पर गाड़ियों को रोककर उनकी जांच करने वाले स्टेट ट्रांसपोर्ट
विभाग के इंस्पेक्टर और ना ही खुद आरटीओ एक्सपर्ट हैं। ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट अनिल छिकारा
का कहना है कि जब से बीएस-6 गाड़ियां आना शुरू हुई हैं। तब से शॉर्ट सर्किट के मामले
अधिक सामने आ रहे हैं। यह स्लीपर बस भी बीएस-6 थी। लग यही रहा है कि यह इलेक्ट्रिकल
फेलियर की वजह से ही हुआ। जिससे पहले बस में अंदर की सारी वायरिंग जल गई और फिर एकदम
से बस आग का गोला बन गई।