कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने 3,271 वोटों से दर्ज की जीत
नागपुर। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने नागपुर डिवीजन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। बेहद रोमांचक मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार और मौजूदा एमएलसी अभिजीत वंजारी ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एवं पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को 3,271 मतों के अंतर से पराजित किया। कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी ने 63,960 वोट हासिल किए। इस सीट पर मंगलवार सुबह शुरू हुई मतगणना गुरुवार, 29 अक्टूबर की तड़के पूरी हुई। करीब 40 घंटे से अधिक समय तक चली वोटों की गिनती में कई बार चुनावी समीकरण बदलते नजर आए। नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नागपुर डिवीजन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इसके बाद मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह मतगणना शुरू हुई। मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहाले ने बढ़त बनाई थी। बुधवार को दूसरे दौर की गिनती पूरी होने तक कोहाले कांग्रेस उम्मीदवार से 4,294 मतों से आगे चल रहे थे। उस समय भाजपा उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 60,924 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को 56,630 मत प्राप्त हुए थे।
निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को 24,249 प्रथम वरीयता मत मिले थे। हालांकि, प्रथम वरीयता के मतों की गणना में कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सका। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और उम्मीदवारों के उन्मूलन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी चरण में अभिजीत वंजारी ने भाजपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ दिया। अभिजीत वंजारी को मिले 67,231 वोट, भाजपा प्रत्याशी को 63,960 अंतिम मतगणना के बाद कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को विजेता घोषित किया गया।
इस जीत के साथ अभिजीत वंजारी ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना लगातार दूसरा कार्यकाल सुनिश्चित कर लिया। इससे पहले वर्ष 2020 में भी वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को हराकर यह सीट जीती थी। इस बार भाजपा ने उम्मीदवार बदलते हुए पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को मैदान में उतारा था, लेकिन पार्टी सीट वापस हासिल नहीं कर सकी। फडणवीस और गडकरी के गृह क्षेत्र में भाजपा की हार नागपुर की स्नातक निर्वाचन सीट राजनीतिक दृष्टि से खास महत्व रखती है। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। इस चुनाव में भाजपा ने पूरी सक्रियता दिखाई थी। मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सुधाकर कोहाले के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में लंबे समय तक भाजपा का प्रभाव रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी स्वयं इस निर्वाचन क्षेत्र से कई बार विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने जुलाई 1990 से मई 2014 तक करीब 24 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था। नितिन गडकरी की पुरानी सीट पर कांग्रेस का लगातार दूसरा कब्जा नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय तक भाजपा के महत्वपूर्ण राजनीतिक आधारों में शामिल रहा। नितिन गडकरी के कार्यकाल के दौरान इस सीट पर भाजपा की मजबूत पकड़ रही थी। लेकिन वर्ष 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को हराकर सीट अपने नाम कर ली थी। वर्ष 2026 के चुनाव में भाजपा ने इसे दोबारा हासिल करने की कोशिश की। पार्टी ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार में वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता के बावजूद अंतिम परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा। राजनीतिक विश्लेषण में इस परिणाम को स्नातक मतदाताओं के बीच स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और चुनावी रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, केवल इस निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे से पूरे नागपुर या महाराष्ट्र के मतदाताओं की राजनीतिक राय का आकलन नहीं किया जा सकता। दूसरी वरीयता के वोटों ने पलट दिया चुनावी मुकाबला नागपुर स्नातक चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू मतगणना की प्रक्रिया रही। दरअसल, विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अधिमान्य मतदान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार प्रथम, द्वितीय और आगे की वरीयता देते हैं। यदि किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के मतों से जीत के लिए निर्धारित कोटा प्राप्त नहीं होता, तो नियमों के अनुसार अन्य वरीयता के मतों की गणना की जाती है। नागपुर में भाजपा उम्मीदवार को शुरुआती बढ़त मिली थी, लेकिन दूसरी वरीयता और उन्मूलन चरणों के बाद कांग्रेस उम्मीदवार आगे निकल गए। इस प्रक्रिया ने मुकाबले को गुरुवार तड़के तक अनिश्चित बनाए रखा।