महाराष्ट्र में ऑनलाइन शेयर बाजार निवेश के नाम पर 4.97 लाख की ठगी, युवक गिरफ्तार
मुंबई। महाराष्ट्र में ऑनलाइन शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद अली कपाडिया के रूप में हुई है। उस पर ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को नकदी के रूप में हासिल करने और उसके लेन-देन में भूमिका निभाने का आरोप है। इस मामले में कल्याण निवासी 42 वर्षीय व्यक्ति से करीब 4.97 लाख रुपये की ठगी की गई थी। साइबर विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस अब इस धोखाधड़ी से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है और ठगी की रकम का पता लगाने में जुटी है।
सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का खेल पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ठगी का शिकार हुआ व्यक्ति महाराष्ट्र के कल्याण इलाके का रहने वाला है। उसे सोशल मीडिया पर शेयर बाजार में निवेश से जुड़ा एक विज्ञापन दिखाई दिया था। विज्ञापन में 'सस्केहाना इंटरनेशनल ग्रुप' का नाम इस्तेमाल किया गया था। इसके माध्यम से उसे निवेश से संबंधित जानकारी देने वाले एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। इस व्हाट्सएप ग्रुप का नाम 'ब्रेकथ्रू कम्युनिकेशन' बताया गया है। शिकायतकर्ता को ग्रुप के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। शुरुआती बातचीत में उसे निवेश संबंधी मार्गदर्शन दिया गया, जिससे वह ग्रुप में दी जा रही जानकारी पर भरोसा करने लगा।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में 25 अगस्त से 23 सितंबर 2026 के बीच धोखाधड़ी की गई। इस दौरान शिकायतकर्ता को ऑनलाइन ट्रेडिंग एप्लिकेशन के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। शिखा शर्मा नाम से संपर्क कर निवेश करने के लिए किया प्रेरित जांच में सामने आया कि व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के बाद शिकायतकर्ता से शिखा शर्मा नाम का इस्तेमाल करने वाली एक महिला ने संपर्क किया। उसने खुद को निवेश संबंधी जानकारी देने वाली व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया और शेयर बाजार में निवेश करने के लिए मार्गदर्शन देना शुरू किया
शिकायत के मुताबिक, महिला ने ऑनलाइन ट्रेडिंग एप्लिकेशन के जरिए निवेश करने की सलाह दी। शिकायतकर्ता को विश्वास हो गया कि वह वास्तविक निवेश प्रक्रिया का हिस्सा बन रहा है। इसी भरोसे के चलते उसने अलग-अलग चरणों में रकम जमा करनी शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने कुल 4.97 लाख रुपये आठ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप और निवेश एप्लिकेशन के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि शिखा शर्मा नाम का इस्तेमाल करने वाली व्यक्ति की वास्तविक पहचान क्या है।
आठ बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए 4.97 लाख रुपये मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता से निवेश के नाम पर प्राप्त रकम एक खाते के बजाय आठ अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई। जब शिकायतकर्ता को अपने साथ वित्तीय धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ, तो उसने 27 सितंबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद महाराष्ट्र साइबर विभाग ने मामले की जांच शुरू की। शिकायत के आधार पर महाराष्ट्र साइबर नोडल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 319(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) और 66(D) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
जांच अधिकारियों ने बैंक खातों के बीच हुए लेन-देन और रकम की निकासी से संबंधित जानकारियां जुटानी शुरू कीं। डिजिटल लेन-देन की जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली। बैंक खातों की जांच से आरोपी मोहम्मद अली कपाडिया तक पहुंची पुलिस महाराष्ट्र साइबर विभाग की जांच में पता चला कि ठगी से संबंधित कुछ रकम निखिल कांबले नाम के व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंची थी। इस खाते से रकम नकद निकाली गई और एक मध्यस्थ के जरिए मोहम्मद अली कपाडिया तक पहुंचाई गई। इसके बाद जांच अधिकारियों ने बैंकिंग लेन-देन और नकदी के हस्तांतरण से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। जानकारी के मुताबिक, 26 अक्टूबर को 23 वर्षीय मोहम्मद अली कपाडिया जांच अधिकारी के सामने पेश हुआ। पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे पहुंचाने में उसकी कथित भूमिका के बारे में सवाल किए। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने कपाडिया को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में उसकी वास्तविक भूमिका और अन्य लोगों के साथ संबंधों की जांच अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम की नकद निकासी में सहयोग किया हो सकता है। पुलिस इस आशंका की भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था। साइबर ठगी के अन्य आरोपियों की तलाश, पुलिस ने बढ़ाई जांच महाराष्ट्र साइबर विभाग अब इस मामले में शामिल अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने में जुटा है। अधिकारियों का मुख्य ध्यान उन बैंक खातों की जांच पर है, जिनमें शिकायतकर्ता से प्राप्त रकम ट्रांसफर कराई गई थी। इसके अलावा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी की पूरी रकम कहां पहुंची और उसमें से कितनी राशि बरामद की जा सकती है। यह मामला ऑनलाइन शेयर बाजार निवेश के नाम पर होने वाली साइबर धोखाधड़ी के खतरों को भी उजागर करता है। साइबर अपराधी कई बार प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों से मिलते-जुलते नाम, सोशल मीडिया विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसकी वैधता और सेबी पंजीकरण की जांच अवश्य करनी चाहिए। अनजान व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। फिलहाल महाराष्ट्र साइबर विभाग की जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की पड़ताल से इस मामले में शामिल अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सकेगा।