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मुंबई : मुंबई में मेट्रो कारशेड के निर्माण के लिए आरे जंगल के 2 हजार से अधिक पेड़ों के काटने के फैसले का सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक में जमकर विरोध हो रहा है। कई बड़ी हस्तियां इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं। उधर मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज के छात्रों ने सर्वाइवल एक्सपर्ट बेयर ग्रिल्स से भी आरे जंगल को बचाने के लिए गुहार लगाई है। मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंच गया है और कोर्ट के जवाब मांगने पर बीएमसी ने 15 दिन का वक्त भी मांगा है। आरे मुंबई का आखिरी बचा हुआ हरित क्षेत्र है। यह गोरेगांव में स्थित है और शहर का ग्रीन लंग कहलाता है। आरे जंगल संजय गांधी नैशनल पार्क का हिस्सा है और समृद्ध जैव विविधता के जरिए मुंबई के पूरे इकोसिस्टम को सपॉर्ट करते हैं। एक इकोसिस्टम को तैयार होने में लगभग हजार साल का वक्त लगता है। उत्तर मुंबई का यह क्षेत्र कभी 3 हजार एकड़ जमीन तक फैला हुआ था लेकिन अब यह केवल 1300 एकड़ तक ही सीमित रह गया है। इसकी बाकी जमीन डेयरी डिवलेपमेंट प्रॉजेक्ट के लिए आरे मिल्क कॉलोनी को दे दी गई थी। खेती की जमीन में बदलने के बाद आरे जंगल कई टुकड़ों में बंट गया है।

आरे के निवासी जिसमें अधिकतर वर्ली जनजाति के लोग शामिल हैं, मुंबई के सबसे पुराने निवासी कहे जाते हैं। इस जंगल में अलग-अलग प्रकार के पक्षी, जीव-जंतु और तेंदुए भी रहते हैं। इस जंगल में 1027 लोग रहते हैं जिनमें से अधिकतर जनजाति हैं। बीएमसी के फैसले से उन पर भी असर पड़ना लाजिमी है। इसी के विरोध में सैकड़ों संगठन के सदस्य और स्थानीय सड़कों पर उतर आए हैं। स्कूल के छात्र भी इस आंदोलन में शामिल होकर पेड़ों को बचाने को लेकर आवाज उठा रहे हैं। वहीं कई फिल्मी हस्तियां और राजनीति से जुड़े लोग भी सेव आरे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। 

सेव आरे आंदोलन को आवाज देने के लिए छात्रों ने सर्वाइवल एक्सपर्ट बेयर ग्रिल्स को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार मनमाने ढंग से और नागरिकों के विरोध के बावजूद भी इकोसिस्टम से खिलवाड़ करने में तुली है। इस बर्बादी का विरोध होना जरूरी है। बता दें कि पिछले महीने ही पीएम नरेंद्र मोदी डिस्कवरी के प्रसिद्ध शो मैन वर्सेज वाइल्ड में बेयर ग्रिल्स के साथ नजर आए थे। एक छात्र नवमी गोरेगांवकर ने बताया, 'हमें पूरी उम्मीद है कि पर्यावरण के चैंपियन आरे जंगल को बचाने के लिए जरूर पहल करेंगे।'

एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी पेड़ों की कटाई का विरोध किया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को कोट करते हुए लिखा कि आरे के जंगल में हरे पेड़ों की कटाई का मैं मजबूती से विरोध करती हूं। उन्होने आगे लिखा, 'सतत विकास को भविष्य का रास्ता बताते हुए मेट्रो के लिए पेड़ काटने की बजाय अन्य विकल्प सोचने की जरूरत है।' इससे पहले सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के अलावा अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी आरे जंगल से पेड़ काटे का विरोध किया है। लता मंगेशकर ने ट्वीट कर कहा, 'मेट्रो शेड के लिए 2700 से अधिक पेड़ों की हत्या करना आरे के जीव सृष्टि और सौंदर्य को हानि पहुंचाना, यह बहुत दुख की बात होगी। मैं इस फैसले का सख्त विरोध करती हूं।' 

अभिनेत्री श्रद्धा कपूर ने भी आरे जंगल से पेड़ काटे जाने का विरोध किया है। इस मामले में पर्यावरणविद गॉडफ्रे पिमेंता ने भी पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने बीएमसी के फैसले का विरोध करते हुए पीएम मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। अभिनेत्री और कांग्रेस नेता उर्मिला मांतोडकर और संजय निरुपम ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। उधर बीएमसी ने जवाब देने के लिए हाई कोर्ट से 15 दिन का वक्त मांगा है और कहा है कि तब तक आरे का कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।

पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सेव आरे फॉरेस्ट का समर्न करते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस, मुंबई मेट्रो और शहरी निकाय अधिकारियों से मेट्रो कारशेड के लिए अन्य विकल्प तलाशने और उपनगर गोरेगांव की आरे कॉलोनी को सरंक्षित करने की अपील की है। इस मामले पर एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने भी आपत्ति जताई है। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने ट्वीट किया, 'आरे सिर्फ 2700 या इससे ज्यादा पेड़ों को काटने का मुद्दा नहीं है। इस इलाके के इकोसिस्टम का मामला है जिससे तेंदुए, अजगर, पक्षी प्रभावित होंगे और इसमें मानव गतिविधि, निर्माण और मशीनें क्या करेंगी।' उधर एमएमआरडीए ने अब मेट्रो 6 के लिए बीएमसी से आरे कॉलोनी की अतिरिक्त 29,869 स्क्वॉयर फीट जमीन की मांग की है। इनका इस्तेमाल साइट ऑफिस, एक लेबर कैंप और एक कास्टिंग यार्ड के लिए किया जाना है।


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