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हिंदी दिवस पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक ट्वीट से शनिवार को भाषा की राजनीति शुरू हो गई। गृहमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘हिंदी दिवस पर मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि हम अपनी मातृभाषा का प्रयोग बढ़ाएं। हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर एक भाषा के पूज्य बापू और लौह पुरुष सरदार पटेल के स्वप्न को साकार करने में योगदान दें।
गृहमंत्री के ट्वीट के बाद विपक्षी दलों ने आपत्ति जताते हुए बयान वापस लेने की मांग की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि लोगों को सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान करना चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा की कीमत पर नहीं। उधर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हिंदी हर भारतीय की मातृभाषा नहीं है। भारत हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व से भी बड़ा है।
उधर, द्रमुख प्रमुख एमके स्टालिन ने भी केंद्रीय गृहमंत्री के ट्वीट का विरोध करते हुए कहा, इससे देश की एकता प्रभावित होगी। एमडीएमके, भाकपा समेत कई दलों ने भी विरोध जताया।
गृहमंत्री ने क्या कहा था ट्वीट में
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर ट्वीट कर कहा था कि भारत की अनेक भाषाएं और बोलियां हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन देश की एक भाषा ऐसी हो, जिससे विदेशी भाषाएं हमारे देश पर हावी ना हों इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने एकमत से हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया।


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