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मुंबई : अंधेरी के रहने वाले दीपेश दुबे घर से तो ठीक-ठाक निकलते हैं, लेकिन वापस सुरक्षित लौट आएंगे इसका उन्हें अंदाजा नहीं है। कांदिवली के समता नगर की ममता पाटील सब्जी लेने के लिए और ठाकुर कॉम्प्लेक्स के गोकुल गार्डन की 9 साल की सपना पाठक स्कूल जाने के लिए, 28 वर्षीय विनीत अग्रहरि दफ्तर जाने के लिए या फिर 62 वर्षीय मालाड के लिबर्टी गार्डन निवासी प्रेमलता दवे कहीं घूमने के लिए घर से बाहर जाती हैं, तो वे आशंकित रहती हैं। इन जैसे तमाम लोगों के मन में डर है कि राह चलते उन्हें कुचल न दिया जाए। कुछ मजबूरी में, तो कुछ जानबूझकर नींद में गाड़ियां चला रहे हैं। नशे की हालत में और तेज गति से ड्राइविंग के मामले भी आए दिन देखने में आते हैं। इन हालात में वाहन चालक तो अपनी जान जोखिम में डालते ही हैं, सड़क पर चलते लोगों की जान सांसत में आ जाती है कि पता नहीं किस घड़ी वे किसी और की लापरवाही का शिकार हो जाएं। इस साल सड़क पर गड्ढों के चलते भी अनेक लोगों की मौत हुई है। इसके लिए सीधे-सीधे सरकार और प्रशासन जिम्मेदार हैं। पिछले सप्ताह सायन स्थित पनवेल-सायन हाइवे और समता नगर स्थित कांदिवली वेस्टर्न हाइवे पर हुए ऐसे ही हादसों में 4 लोगों की मौत हो गई थी। 

ट्रैफिक एक्सपर्ट विवेक गुप्ता बताते हैं कि हमारे यहां सड़क-परिवहन का हाल बहुत बुरा है। मुंबई में न तो कायदे की सड़कें हैं, न उन पर ट्रैफिक के नियम सही तरीके से लागू होते हैं। सड़कों पर उचित डिवाइडर नहीं हैं। कहीं-कहीं तो पर्याप्त रोशनी भी नहीं है। रेड लाइट की सही व्यवस्था और ड्राइवरों के पास समुचित प्रशिक्षण नहीं है। ट्रक, डंपर और लॉरी ड्राइवरों को बहुत ही लंबी और थका देने वाली ड्यूटी करनी पड़ती है। इस वजह से वे कभी नींद में तो कभी हड़बड़ी में गैरकानूनी तरीके से वाहन चलाते हैं, जिसकी चपेट में आकर दूसरे वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं। यहां तक कि ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए भी नियम-कायदे ताक पर रख दिए जाए हैं। जब भी आप वाहन चलाएं तो उससे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपको नींद तो नहीं आ रही है। पेशेवर ड्राइवर अक्सर दो और तीन पालियों में भी ड्राइविंग करते हैं। कभी-कभी दिनभर और रातभर ड्राइविंग करते हैं। इससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और हादसे की आशंका बढ़ जाती है। नींद पूरी करने के बाद ही लंबी दूरी पर ड्राइविंग के लिए निकलें। दूसरा कारण नशा: नशा करके वाहन चलाते वक्त वाहन पर पूरा नियत्रंण नहीं रहता है। ऐसे में वे लोग अपनी जान के साथ-साथ दूसरों की जान के लिए भी खतरा बन जाते हैं। कभी भी नशा कर ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए। तीसरा कारण तेज रफ्तार: जब भी तेज रफ्तार में वाहन चलाया जाता है, तो उस पर ड्राइवर का कंट्रोल कम होने लगता है। सामने कुछ भी रुकावट आने पर ब्रेक जल्दी नहीं लगा पाते हैं और वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।


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