चंद्रपुर : जिले में छाया कोरोना का खौफ, ताड़ोबा की 60 फीसदी बुकिंग रद्द
चंद्रपुर : चीन में मौत का तांडव मचाने के बाद दुनिया के कई देशों में पैर फैला रही घातक संक्रमक बीमारी कोरोना ने भारत में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. इस बीमारी के चलते जिले की जनता भी खौफजदा है.जिसके चलते भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जहां रोजाना हजारों की तादाद में लोग नजर आते थे वहां अब लोगों की मौजूदगी कम होती जा रही है. कोरोना के कारण की यहा भरनेवाली प्रसध्दि देवी महाकाली की जत्रा पर असर पड़ने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है. महाकाली मेले पर कोरोना का संकट छाने के पूरे आसार नजर आरहे है. वहीं ग्रीष्मकालिन अवकाश के चलते पट्टेदार बाघों के लिए वश्वि में प्रसध्दि ताड़ोबाट्ठअंधारी व्याघ्र प्रकल्प में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन होता है. परंतु इस वर्ष कोरोना के खौफ का असर है कि दो माह की गई 60 प्रश बुकिंग रद्द कर दी गई है.
महाभयावह कोरोना संक्रमक बीमारी चीन के युहान शहर से शुरू होकर पूरी दुनिया में फैल रही है. देश में जहां एक ओर कई मामले सामने आये है वहीं महाराष्ट्र में अब तक 11, पुणे में 8, मुंबई में 2 और नगापुर में 1 मरीज के कोरोना बीमारी से प्रभावित पाये जाने की खबर ने लोगों में और भी दहशत नर्मिाण कर दी है. यह बीमारी अब सभी क्षेत्रों में धीरे धीरे पांव पसार रही है. इसके चलते सार्वजनिक उत्सवों पर इसका असर होने की संभावना बलवती हुई है.
यहां चंद्रपुर में देवी महाकाली का ऐतिहासिक और पुरातन मंदिर है, देवी महाकाली को मध्य महाराष्ट्र में आराध्य दैवत के रूप में पूजा जाता है. यहां प्रतिवर्ष चैत्र माह में महाकाली की जत्रा भरती है. जिसमें चैत्रपूर्णिमा को जत्रा का मुख्य दिन होता है. जो कि इस वर्ष 8 अप्रैल को आयोजित होगी. चैत्र पूर्णिमा की इस महापूजा में हस्सिा लेने के लिए मराठवाडा, विदर्भ, तेलंगाना से हजारों की संख्या में श्रध्दालुओं का आगमन एक माह पूर्व से शुरू हो जाता है. काफी बरसों पूर्व तो एक माह पूर्व से यहां मेले का स्वरूप प्राप्त हो जाता था परंतु अब यह सिमटकर 15 दिनों का रह गया है. चैत्रपूर्णिमा के दिन तो लाखों की भीड़ एकत्रित होती है. इस वर्ष जिस तरह से कोरोना वायरस से सभी में खौफ पैदा किया है उससे जत्रा में श्रध्दालुओं के एकत्रित होने पर प्रश्नचन्हि लग गया है. कोरोना के चलते देवी महाकाली की जत्रा संकट में नजर आ रही है.
पट्टेदार बाघों के लिए दुनिया भर में प्रसध्दि ताड़ोबाट्ठअंधारी बाघ प्रकल्प में ना केवल देश बल्कि दुनिया के कोने कोने से पर्यटक यहां आते है. परंतु जब से कोरोना के संक्रमण फैला है तब से ताड़ोबा के पर्यटन पर काफी असर पड़ा है विदेशी पर्यटकों की संख्या तो अब ना के बराबर हो गई है. ग्रीष्मऋतु में बाघों के हमखास दर्शन होने और ग्रीष्मकालिन छुट्टियां होने से देश के लोग भी ताड़ोबा आगमन का प्लान बनाते है और इसके लिए दो माह पूर्व से ही बुकिंग कर दी जाती है. अप्रैल और मई दो महीने होते है जिसमें यहां पर्यटकों की तादाद सर्वाधिक होती है परंतु कोरोना के खौफ के कारण 60 प्रश पर्यटकों ने अपनी बुकिंग कैन्सल कर दी है. पर्यटकों की बुकिंग रद्द होने से यहां के रोजगार पर इसका असर हुआ है. जप्सिी चालक, गाईड समेत अन्य हस्तशल्पि कारीगरों को जो रोजगार की आस बंधी रहती थी वह धूमिल होती नजर आ रही है.
कोरोना वायरस मुर्गियों से फैलने की अफवाह के कारण चंद्रपुर महानगर समेत पूरे जिले में मुर्गीपालन व्यवसाय और चिकन वक्रिेताओं पर संक्रांत आयी हुई है. रंगपंचमी के दिन जहां एक ओर मटर मार्केट में बड़ी संख्या में खरीददारों की भीड़ थी वहीं चिकन वक्रिेताओं के पास कोई नजर नहीं आ रहा था. कोरोना के कारण पिछले 15 दिनों से यह व्यवसाय काफी प्रभावित है. चिकन का शुक्रवार और रविवार को सर्वाधिक व्यवसाय होता है. पूरे जिले में लाखों रूपये का व्यवहार इन दो दिनों में होता है यह आंकड़ा गिर कर हजारों में आ गया है. महानगर के भिवापुर वार्ड के सुपरमार्केट, बंगाली कैम्प के चिकन मार्केट, बजाज पॉलीटेक्निक कालेज के मार्केट, रामनगर, श्री टॉकीज चौक, बालाजी वार्ड, दुर्गापुर आदि क्षेत्रों में स्थित मार्केट में चिकन वक्रिेताओं में उदासी छायी हुई है. उनका कहना है कि पहले बायलर चिकन 120 से 140रूपये नग बिकता था अब 100 रूपये में कोई खरीदने को तैयार नहीं है.
कोरोना वायरस के खतरे को शक्षिण विभाग ने गंभीरता से लिया है और वद्यिार्थियों में इस बारे में जनजागरण शुरू हो गया है. वद्यिार्थियों को विशेष सतर्कता बरतने, भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह देने, मास्क का इस्तेमाल करने के नर्दिेश शक्षिण विभाग आयुक्त ने शक्षिणाधिकारी को दिए है. साथ यह भी कहा गया है कि बच्चों को मास्क सख्ती नहीं की जाए. आज स्कूलों में शक्षिकों द्वारा बच्चों को बारंबार हाथ धोने, श्वसन संबंधित शष्टिाचार का पालन करने जैसे कि छींकते, खांसते हुए रूमाल अथवा टश्यिू पेपर का इस्तेमाल करने, बीमार हो तो स्कूल ना आने, बीमार व्यक्ति से दूर रहने के संबंध में मार्गदर्शन किया गया. कोरोना के डर से कुछ वद्यिार्थी स्कूलों में मास्क लगाकर पहुंच रहे है शक्षिण विभाग के आयुक्त सोलंकी ने शक्षिणाधिकारी को स्पष्ट नर्दिेश दिए है कि बच्चों को मास्क की सख्ती ना करें.