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पालघर : पालघर के गड़चिंचले गांव में 16 अप्रैल को 2 संतों सहित 3 लोगों की हत्या मामले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. इस बर्बर हत्याकांड में पुलिस की भूमिका पूरी तरह शक के घेरे में है, क्योंकि पालघर के एसपी गौरव सिंह ने खुलासा किया कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों को फायरिंग का आदेश दिया गया था इसके बावजूद पुलिस ने फायरिंग नहीं की.

 जब इस घटना को लेकर नवभारत  संवाददाता  ने एक चश्मदीद से बात की, तो उसका कहना था कि घटना के दिन संत यहां से सूरत की तरफ गये, लेकिन लॉकडाउन के कारण दादरा नगर हवेली में तैनात पुलिस के जवानों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया. कुछ ही समय बाद संत वापस लौटकर आए और इनकी गाड़ी का पीछा करते हुए पीछे से कुछ लोग आए.  पीछे से आए लोग फारेस्ट चौकी पर तैनात कर्मियों को धमकी देते हुए वहां पर लगे बैरियर को गिराकर संतों की गाड़ी को रोका और भीड़ ने संतों की गाड़ी की हवा निकाल कर संतों समेत पलट दिया. इसके बाद  गाड़ी पर पत्थरबाजी करने लगे. पलटी हुई कार में संत सीट के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने लगे.  इसी दौरान एक संत के सिर पर पत्थर लगने से खून बहने लगा और ये संत पलटी हुई गाड़ी में से ही हाथ दिखाकर कह रहे थे कि हम संत हैं, हमें मत मारो, फिर भी लोग नहीं माने.

इस घटना के 2 घंटे बाद पहुंची पुलिस ने उन्हें पलटी हुई कार से खींचकर बाहर निकाला और 2 लोगों को अपनी गाड़ी में बैठाया और 1 संत पुलिस का हाथ पकड़कर अपनी जान बचाने की कोशिश करता रहा, लेकिन घटनास्थल पर मौजूद करीब 15 पुलिस के जवान संतों को और उनके चालक को बचाने की बजाय उन्हें भीड़ के सामने असहाय छोड़ दिया. इस बीच लोगों ने पीट-पीटकर संतों और उनके कार चालक को मौत के घाट उतार दिया. कहा जा रहा है कि अगर पुलिस सूझबूझ के साथ इन संतों को फारेस्ट की चौकी के अंदर बंदकर अतिरिक्त पुलिस फोर्स मंगाकर संतों को बाहर निकालती तो शायद उनकी जान बच सकती थी.

संतों के साथ हो रही मारपीट का विरोध करने वाली गड़चिंचले गांव की सरपंच ने अपनी और अपने परिवार की जान की सुरक्षा को लेकर गुहार लगाई थी. यह बात मीडिया में आने के बाद पुलिस प्रशासन ने इस गांव की महिला सरपंच के घर के बाहर अब 2 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है. गड़चिंचले गांव में हुई घटना को लेकर पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल के बाद पालघर के एसपी गौरव सिंह का कहना है कि घटनास्थल पर पहले जो दो पुलिस के जवान पहुंचे थे, उनके पास हथियार नहीं थे, लेकिन उसके बाद पहुंची पुलिस के पास हथियार थे और उन्हें फायरिंग के आदेश दिए गए थे, लेकिन वहां जमा भीड़ और माहौल को देखते पुलिस ने फायरिंग नहीं की. अगर पुलिस फायरिंग करती तो माहौल और बिगड़ सकता था. घटनास्थल पर पहुंचे हमारे लोगों ने संतों को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन पुलिस बल कम होने के कारण और भीड़ ज्यादा होने के कारण हमारे लोग सफल नहीं हुए.


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