मुंबई : 700 डॉक्टर्स ही काम के लिए हुए क्वालीफाई
मुंबई : बढ़ते कोरोना मरीज़ों के साथ अस्पतालों और नए कोविड केअर सेंटर्स पर डॉक्टरों की कमी खल सकती है. काम करने की इच्छा जताने वाले 20000 डॉक्टरों में से केवल 700 डॉक्टर्स ही क्वालीफाई हो पाए हैं. ऐसे में बीएमसी के डॉक्टरों पर पड़ रहा बोझ कम होता नहीं दिखाई दे रहा है. बीएमसी के वरिष्ठ डॉक्टरों की माने तो नए कोविड केअर सेंटर्स शुरू होने के बाद वहां भी डॉक्टरों की जरूरत है. एक सेंटर पर 200 से 250 डॉक्टरों की जरूरत है जो अनुभवी हो और परिस्थिति को संभाल सके.
मुंबई में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई अस्पतालों को कोविड अस्पतालों में तब्दील किया गया. डॉक्टरों की तुलना में मरीजों की संख्या अधिक होने से लोड भी बढ़ता गया.इसी के मद्देनजर सरकार ने यह निर्णय लिया कि मुंबई के निजी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस के अलावा बीएमसी अस्पतालों में भी अपना समय देना होगा. इसके तहत वैद्यकीय शिक्षण और संशोधन संचालनालय (डीएमईआर) ने मुंबई के सभी डॉक्टरों को एक फॉर्म भरने का आदेश दिया था. महाराष्ट्र मेडिकल कॉउन्सिल के पास रजिस्टर शहर के 25 हजार डॉक्टरों में से 20 हजार ने स्वेच्छा से फॉर्म भरा था.डॉक्टरों की उम्र, स्वास्थ्य को देखते हुए डीएमईआर ने 25 से 45 उम्र के 4 हजार डॉक्टरों को काम के लिए चुना था, लेकिन बाद में मात्र 700 डॉक्टर ही क्वालीफाई हो पाए.
बीएमसी स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 4000 डॉक्टर्स को चुना गया, लेकिन उनमें से भी कई लोग सरकारी अस्पतालों में कार्यरत हैं तो कुछ निजी अस्पतालों में अगर उन्हें बुलाया जाता है तो संबंधित अस्पताल की सेवा भी चरमरा जाएगी. कई डॉक्टर्स मुंबई से डॉक्टरी की, लेकिन अब वो विदेश में हैं तो कुछ राज्य से बाहर हैं. वैसे भी ये लोग 4 सप्ताह के लिए काम करेंगे उसके बाद फिर वही हाल होना है. बीएमसी की उपकार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह ने कहा कि हमने कई डॉक्टरों की पोस्टिंग कुछ अस्पतालों में की है. मौजूदा परिस्थिति को संभालने के लिए हमारे डॉक्टर्स सक्षम हैं.
बीएमसी के सायन, केईएम, नायर, ट्रामा केअर, भाभा, राजवाड़ी सहित अन्य अस्पतालों में कार्यरत 150 से भी अधिक निवासी डॉक्टर और फैकल्टी डॉक्टर कोरोना की चपेट में आए हैं. इनमें से कई रिकवर भी होने की बात निवासी डॉक्टरों ने कही.निवासी डॉक्टरों के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अस्पताल को तो मैनेज करने के लिए हम सक्षम हैं, लेकिन बढ़ते कोरोना सेंटर्स में अगर अस्पताल के डॉक्टरों को भेजा जाता है तो समस्या बढ़ सकती है.