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मुंबई :  देशभर में टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की ब्लैक-मार्केटिंग की खबरें बहुत आई हैं, पर अब पता चला है कि यह इंजेक्शन अब नकली भी बन रहे हैं। डीसीपी अकबर पठान ने बताया कि हमने इस केस में दिल्ली से अजय नाशा नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसका दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में मेडिकल स्टोर था। कोरोना के इलाज के लिए अभी वैक्सीन बनी नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार ने कुछ दवाओं और इंजेक्शन को आपात स्थितियों में डॉक्टरों की सिफारिश पर इस्तेमाल की इजाजत दी है। टोसिलिजुमैब इंजेक्शन इनमें से एक है।

अजय नाशा का नाम दरअसल, आजम नसीर खान नामक आरोपी से पूछताछ में सामने आया था, जिसे बांद्रा क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त को गिरफ्तार किया था। सीनियर इंस्पेक्टर महेश देसाई, संजीव गावडे और सुधीर जाधव की टीम ने उसके पास से 15 इंजेक्शन भी जब्त किए थे। इस केस के जांच अधिकारी नंदकुमार गोपाले ने बताया कि Tocilzumab इंजेक्शन स्विट्जरलैंड में बनते हैं। भारत में इसे सिपला दवा कंपनी के जरिए बेचा जाता है। गोपाले के अनुसार, अगस्त में जब्त इंजेक्शन को जब हमने सिपला कंपनी के पास चेकिंग के लिए भेजा, तो वहां से इसके सैंपल्स स्विट्जरलैंड भेजे गए। वहां से अब जवाब आया है कि मुंबई में जब्त किए गए और Tocilzumab नाम से बेचे गए इंजेक्शन नकली हैं। गोपाले के अनुसार, यह इंजेक्शन ब्लैक में बेचने के कई मामले आए, पर नकली तरीके से बनाने और पकड़े जाने का यह देश का पहला मामला है। उन्होंने कहा कि यह तो लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है, इसलिए हमने अजय नाशा को गिरफ्तार किया है।

अगस्त में जब आजम नसीर खान को गिरफ्तार किया गया था, तब वह 40 हजार रुपये के इंजेक्शन को मुंबई में एक लाख रुपये में बेच रहा था। आजम ने तब बताया था कि यह इंजेक्शन स्विट्जरलैंड से भारत में किसी बड़ी दवा कंपनी द्वारा मंगाया जाता है और फिर डिस्ट्रिब्यूटर्स को भेजा जाता है। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, मुंबई में सिर्फ तीन-चार डिस्ट्रिब्यूटर्स को ही इस इंजेक्शन को बेचने का लाइसेंस मिला है। उसमें भी बहुत कड़ी शर्तें हैं, जैसे किसी डॉक्टर की सिफारिश, आधार कार्ड की डिटेल आदि। लेकिन इस इंजेक्शन की कालाबाजारी से जुड़े लोग मोटी कमाई के लालच में बिना किसी शर्त के इसे बेचते हैं।

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