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मुंबई : कोरोना के मामले घटने के साथ ही लोगों की सुविधाओं के लिए कई तरह की छूट दी जा रही हैं। मगर इन छूट का उल्लंघन हो रहा हैं। मुंबई लोकल इसका ताजा उदाहरण बन गई है। मुंबई लोकल में फिलहाल सामान्य लोगों को यात्रा की अनुमति नहीं है। व्यापार और ऑफिस के कामकाज के अलावा बेहद जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को ही इजाजत दी गई है। इस प्रतिबंध के बावजूद मुंबई लोकल में अब करीब 35 लाख यात्री चलने लगे हैं। खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर यात्री फर्जी पहचान पत्र पर यात्रा कर रहे हैं। ट्रेनों में पीक ऑवर्स की तरह भीड़ दिखाई देने लगी है। ऐसे में चिंता और भी तब बढ़ जाती है जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लापरवाही का यही रवैया रहा तो 6-8 सप्ताह में तीसरी लहर आ सकती है।

जवेरी बाजार, भूलेश्वर, कालबादेवी, क्रॉफर्ड मार्केट, अब्दुल रहमान स्ट्रीट, मस्जिद बंदर इस तरह के व्यापारी क्षेत्रों मुंबई के दूसरे छोर से आने वाले कई हॉकर्स और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले फर्जी पहचान पत्रों पर यात्रा कर रहे हैं। एक हॉकर ने बताया कि मेडिकल, सिक्युरिटी गार्ड इत्यादि के पहचान पत्र ₹300 से ₹500 रूपये में तैयार हो जाते हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार कई सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों उपस्थिति को बढ़ाया गया है। इसके अलावा मॉनसून से जुड़े कामों को अंजाम देने के लिए कॉन्ट्रैक्ट लेबर की भीड़ भी बढ़ी है। इसलिए ट्रेनों में अपेक्षाकृत ज्यादा भीड़ दिखाई देने लगी है। 

सूत्रों की मानें तो मुंबई लोकल में करीब 40% सामान्य यात्री चल रहे हैं। बारिश में ऐसे यात्रियों की संख्या घट जाती है जिन्हें अनुमति नहीं है। जब 9 और 12 जून को मुंबई में मूसलाधार बारिश हुई थी उस दिन मध्य रेलवे पर करीब 6.5 और 8 लाख यात्रियों ने सफर किया था। लॉकडाउन के दौरान अतिआवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रेलवे ने 15 जून 2020 से लोकल ट्रेनें शुरू की थी। शुरुआत में रोजाना केवल 30 हज़ार लोग यात्रा कर रहे थे। 29 जनवरी 2021 तक यात्रियों की संख्या 19 लाख पहुंच गई। 1 फरवरी के बाद प्रतिदिन लगभग 36-37 लाख यात्री सफर करने लगे। 1 अप्रैल को लॉकडाउन 2.0 के बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट हुई और रोजाना करीब दस लाख लोग यात्रा करने लगे।


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