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मुंबई : हर साल की तरह इस साल भी जून में मुंबई पुलिस ने खोए हुए बच्चों को तलाशने की मुहिम चलाई। इस अभियान ऑपरेशन मुस्कान के तहत भीख मांगने वाले, लावारिस या लापता बच्चों की तलाश की जाती है। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक होती है। मुंबई पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 30 दिन में पुलिस ने 145 बच्चों को ढूंढा। इनमें 29 लड़के और 116 लड़कियां हैं।

लड़कियों को पुलिस की विशेष टीम ने बाल मजदूरी, ह्यूमन ट्रैफिकिंग और भीख मांगने से लेकर लोगों के घरों में काम करते हुए भी रेस्क्यू किया है। लड़कों को समाज सेवा विभाग ने बाल मजदूरी, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और भीख मांगते हुए रेस्क्यू किया है।

मई में मुंबई पुलिस को 909 बच्चों की गुमशुदगी की शिकायतें मिली थीं। विभिन्न पुलिस स्टेशनों में मिसिंग रिकॉर्ड के तहत 23 लड़कों और 105 लड़कियों के गुम होने की शिकायत दर्ज की थी। डीसीपी राजपूत का इस बारे में कहना है कि छोटे बच्चों को खोजना कतई आसान नहीं होता। इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है। यह बड़ी जिम्मेदारी का काम है। हर साल ही जून में ऑपरेशन मुस्कान के तहत बड़ी तत्परता के साथ बच्चों की खोज की जाती है।

उल्लेखनीय है कि मुंबई पुलिस के आयुक्त हेमंत नगराले, संयुक्त पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मिलिंद भारंबे के मार्गदर्शन में सभी पांचों रीजनों के अडिशनल सीपी, सभी जोनों के डीसीपी और सभी डिविजनों के एसीपी ने ऑपरेशन मुस्कान को सफलता प्रदान करने में विशेष ध्यान दिया और इस मुहिम को आगे बढ़ाया।


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