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मुंबई : वसूली के आरोपों में फंसे मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ठाणे की एक अदालत ने परमबीर सिंह के खिलाफ गुरुवार को एक गैर जमानती वारंट जारी किया है। परमबीर सिंह, इस साल मई से लापता हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच ने उन्हें नौ अक्तूबर को वसूली मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा था। लेकिन, न वो खुद आए न उनकी तरफ से कोई जवाब ही आया।
परमबीर सिंह स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर जाने के बाद से मई से लापता हैं। सिंह को उनके चंडीगढ़ स्थित आवास पर कई पत्र भेजे गए और उनके ठिकानों के बारे में पूछताछ की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पिछले महीने, गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा था कि वे आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के प्रावधानों को देख रहे हैं।
एंटीलिया मामले में छीना गया था मुंबई पुलिस प्रमुख का पद
ठाणे पुलिस ने जुलाई में परमबीर सिंह के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी किया था। दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटकों वाली एसयूवी मिलने के मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी (एपीआई) सचिन वाजे को गिरफ्तार किए जाने के बाद परमबीर सिंह को भी मुंबई पुलिस प्रमुख के पद से हटा दिया गया और होमगार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया था।
सिंह ने पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गंभीर आरोप
इसके बाद परमबीर सिंह ने राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाते कि देशमुख ने सचिन वाजे को मुंबई के होटलों और बार से हर महीने 100 करोड़ रुपये लेने के लिए कहा था। हालांकि इस आरोप से देशमुख ने इनकार किया है। उधर, महाराष्ट्र के गृह विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, परमबीर सिंह को भगोड़ा घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।


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