Latest News

मुंबई: महाराष्ट्र थोरियम आधारित बिजली संयंत्र स्थापित करने वाला पहला राज्य बन सकता है। राज्य सरकार परमाणु ऊर्जा विभाग और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम के साथ दो इकाइयां स्थापित करने के लिए बातचीत के उन्नत चरण में है। ये योजना अगर कामयाब हुई तो स्वदेशी करंट यानी थोरियम से बिजली इस्तेमाल करने वाला पहला राज्य बन जाएगा। दरअसल, भारत थोरियम के मामले में बेहद समृद्ध है, मगर यूरेनियम के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। 

1,540 मेगावाट के थोरियम संयंत्र बनेंगे

प्रस्तावित थोरियम संयंत्र महाराष्ट्र की बिजली कंपनी 'महाजेनको' के स्वामित्व वाली भूमि पर स्थापित किए जाएंगे, जो बातचीत में भी शामिल है। आने वाले महीनों में इस समझौते को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसमें 1,540 मेगावाट का एक थोरियम संयंत्र और 440 मेगावाट की एक इकाई शामिल है, जो महाजेनको के दो पुराने ताप विद्युत संयंत्रों का स्थान लेगी।

महाराष्ट्र को कार्बन मुक्त करेगी ये बिजली

राज्य सरकार के थिंक टैंक महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (मित्रा) इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है, जिसका मकसद न केवल स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करना है, बल्कि सस्ती बिजली भी मुहैया कराना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के विजन के मुताबिक राज्य को कार्बन मुक्त करने की ऊर्जा परिवर्तन योजना का हिस्सा है।

थोरियम प्लांट को चलाने का खर्चा थर्मल से कम

महाराष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा-यह नागरिक उपयोग के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग हेतु राज्य के रोडमैप का भी हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार, एक जिले में 770 मेगावाट की दो इकाइयां और दूसरे जिले में 220 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित की जाएंगी। एक अधिकारी ने बताया-थोरियम के अनेक लाभ हैं...यह अधिक सुरक्षित है और भारत में इसकी प्रचुरता है। हालांकि थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने की तुलना में यह थोड़ा महंगा होगा, लेकिन थोरियम पावर प्लांट की परिचालन लागत थर्मल पावर प्लांट की तुलना में काफी कम है। हमारा अनुमान है कि इस थोरियम पावर प्लांट से बिजली की कीमत 3.50 रुपये प्रति यूनिट होगी।

Weather Forecast

Advertisement

Live Cricket Score

Stock Market | Sensex

Advertisement