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मुंबई : बीएमसी करीब आठ साल बाद शहर में फिर से वृक्ष गणना (ट्री सेंसस) शुरू करने जा रही है। यह अभियान अगले सप्ताह से शुरू होगा जिसके तहत पूरे शहर में पेड़ों की संख्या और स्थिति का आकलन किया जाएगा। मुंबई में आखिरी बार साल 2018 में पेड़ों की गणना हुई थी। इस दौरान शहर में 29.75 लाख पेड़ पाए गए थे, जबकि आरे क्षेत्र को शामिल करने पर यह संख्या करीब 33.7 लाख तक पहुंच गई थी। इस बार अधिकारियों को उम्मीद है कि पेड़ों की संख्या में बढ़ोतरी होगी खासकर हाल के वर्षों में विकसित किए गए मियावाकी जंगलों के कारण। मियावाकी पद्धति जिसे जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था इस पद्धति को मुंबई में बड़े पैमाने पर अपनाया गया है। इस पहल को पूर्व मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी ने बढ़ावा दिया था, जिसके तहत शहर में कई जगहों पर छोटे-छोटे शहरी जंगल विकसित किए गए।

उद्यान अधीक्षक जितेंद्र परदेशी के अनुसार, "पिछले कुछ वर्षों में मियावाकी प्लांटेशन में तेजी आई है, जिससे इस बार पेड़ों की संख्या बढ़ने की संभावना है। वृक्ष गणना प्रक्रिया लगभग डेढ़ साल में पूरी होने की उम्मीद है। यह वृक्ष गणना हर पांच साल में अनिवार्य होती है, लेकिन पहले यह 2008 और 2018 में ही हो पाई थी। अधिकारियों के मुताबिक, इस बार देरी का कारण कोरोना महामारी और उससे जुड़ी व्यवस्थागत चुनौतियां रहीं। आरे कॉलोनी को इस बार शामिल किया जाएगा या नहीं, इस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। पिछली बार इसे डेयरी विभाग के अनुरोध पर शामिल किया गया था। वहीं, सर्वे की शुरुआत कहां से होगी, यह भी अभी तय नहीं है- पिछली बार इसकी शुरुआत राजभवन से हुई थी।

2018 के आंकड़ों के अनुसार, नारियल के पेड़ (2.11 लाख) सबसे अधिक संख्या में थे, इसके बाद अशोक, आम, पेल्टोफोरम, पीपल, गूलर, गुलमोहर और जामुन जैसे पेड़ प्रमुख थे। इसी बीच मानसून की तैयारी के तहत बीएमसी ने पेड़ों की छंटाई अभियान भी तेज कर दिया है। 46,336 पेड़ों की पहचान की गई है, जिनमें से अब तक 12,561 पेड़ों की छंटाई की जा चुकी है। यह काम 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य है।


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