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मुंबई :  मुंबई के प्रसिद्ध Sir J. J. Hospital में सोमवार से स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। बड़ी संख्या में अंडर ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों ने 16 फरवरी से सामूहिक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। 

डॉक्टरों का कहना है कि यह आंदोलन स्टूडेंट गवर्नेंस, इंस्टीट्यूशनल ऑटोनॉमी और कैंपस में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर है। उनका आरोप है कि प्रशासन द्वारा छात्र संगठनों के कामकाज में लगातार दखल दिया जा रहा है। 

ग्रांट मेडिकल कॉलेज जिमखाना को लेकर विवाद

डॉक्टरों ने विशेष रूप से Grant Medical College जिमखाना के कामकाज में हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि चुनी हुई ग्रांट मेडिकल कॉलेज स्टूडेंट्स एसोसिएशन की शक्तियों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे छात्रों की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। 

डॉक्टरों की संस्था के महासचिव ऋषिकेश शिंदे ने बताया कि हड़ताल के पहले दिन करीब 200 डॉक्टर और रेजिडेंट इसमें शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जिमखाना की स्वायत्तता को बचाने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक हो गया है। 

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका

रेजिडेंट डॉक्टर अस्पताल की सेवाओं की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में उनके आंदोलन पर जाने से ओपीडी, इमरजेंसी और वार्ड सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। मरीजों और उनके परिजनों में इसको लेकर चिंता बढ़ने लगी है। 

हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रबंधन इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।

समाधान की राह पर निगाहें

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का संकल्प जताया है।

अब सबकी नजरें प्रशासन और डॉक्टरों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है और मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।


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