मुंबई पुलिस एक्शन में, वायरल आतंकी अलर्ट पोस्ट की जांच तेज
मुंबई : सोशल मीडिया पर मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में संभावित आतंकी हमले की चेतावनी से जुड़ी एक पोस्ट वायरल होने के बाद मुंबई पुलिस सतर्क हो गई है। पुलिस ने इस पोस्ट का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी तरह के वास्तविक खतरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पोस्ट की सत्यता, उसके स्रोत और उसके पीछे की मंशा का पता लगाने के लिए साइबर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।
जानकारी के अनुसार, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई थी। इस पोस्ट में दावा किया गया कि अगस्त 2026 के दौरान भारत को गंभीर सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ सकता है। पोस्ट में विशेष रूप से **9 अगस्त से 18 अगस्त 2026** के बीच की अवधि को "अत्यंत संवेदनशील" बताया गया और आशंका जताई गई कि पाकिस्तानी आतंकवादी किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। इसके बाद एक अन्य एक्स यूजर ने इस पोस्ट को मुंबई पुलिस के आधिकारिक हैंडल को टैग करते हुए मामले पर ध्यान देने की अपील की। जैसे ही यह जानकारी पुलिस तक पहुंची, मुंबई पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने तत्काल पोस्ट का विश्लेषण शुरू किया और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने साइबर सेल को मामले की जांच सौंपते हुए यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की है कि पोस्ट किसने साझा की, उसका वास्तविक स्रोत क्या है और उसमें किए गए दावों का किसी विश्वसनीय खुफिया सूचना या सुरक्षा इनपुट से कोई संबंध है या नहीं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं यह पोस्ट लोगों में डर और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से तो नहीं डाली गई।
मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस समय किसी भी प्रकार के संभावित आतंकी हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उनका कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू पर नजर बनाए हुए हैं और यदि किसी प्रकार का वास्तविक खतरा सामने आता है तो आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएंगे। फिलहाल जांच का उद्देश्य पोस्ट की प्रामाणिकता और उसके पीछे की मंशा को समझना है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें। किसी भी सुरक्षा संबंधी जानकारी के लिए केवल पुलिस, गृह विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक घोषणाओं पर ही विश्वास करें। पुलिस का कहना है कि बिना पुष्टि के ऐसे संदेशों को आगे साझा करना समाज में अनावश्यक दहशत और भ्रम का माहौल पैदा कर सकता है।