मुंबई: मुंबई: महाराष्ट्र में कम्युनिटी क्लिनिकल मेडिकल प्रैक्टिशनर (सीसीएमपी) पंजीकरण को लेकर एमबीबीएस और बीएचएमएस डॉक्टरों के बीच ठन गई है। दरअसल विवाद होमियोपैथी और एलोपैथी दवाईयां देने को लेकर बढ़ा है। होमियोपैथी डॉक्टरों को अंग्रेजी दवाईयां देने की अनुमति देने के सरकार के फैसले का एमबीबीएस डॉक्टरों ने कड़ा विरोध किया है और हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार ने सीसीएमपी पात्र डॉक्टरों की भूमिका, कार्यक्षेत्र, मानक कार्यप्रणाली, चिकित्सा आचार संहिता और जिम्मेदारियां तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। दूसरी ओर इस प्रक्रिया और अपनी लंबित मांगों को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर ने कल बुधवार से राज्यव्यापी कामबंद हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। इस हड़ताल के कारण नियमित ओपीडी और कुछ नियोजित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आपातकालीन, आईसीयू, कैजुअल्टी, प्रसूति गृह और अन्य जीवनरक्षक सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी।

सेंट्रल मार्ड ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने तक सीसीएमपी पंजीकरण पर पुनर्विचार और रेजिडेंट डॉक्टरों की सेवा संबंधी मांगों के समाधान की मांग की है। इस आंदोलन को कई नामचीन अस्पतालों के डॉक्टरों की यूनियन मार्ड ने समर्थन किया है। बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीकरण विवाद पर मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के 24 घंटे के सांकेतिक बंद में मुंबई के 2,000 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए। आईएमए महाराष्ट्र ने कहा कि सीसीएमपी पंजीकरण का निर्णय आधुनिक चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की सुरक्षा पर दीर्घकालीन असर डाल सकता है।

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