समुद्र प्रदक्षिणा से लौटीं नौ महिला अधिकारी, 314 दिन में 25,500 नॉटिकल मील का सफर
मुंबई : भारतीय सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों ने समुद्री साहस और दृढ़ संकल्प की एक और ऐतिहासिक मिसाल कायम की है। भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की नौ महिला अधिकारियों ने दुनिया का सफलतापूर्वक चक्कर लगाने के बाद भारतीय सेना के सेलिंग वेसल ‘त्रिवेणी’ से मुंबई लौटकर एक ऐतिहासिक अभियान को पूरा किया। करीब 314 दिनों तक चले इस अभियान के दौरान महिला अधिकारियों ने चार बड़े महासागरों को पार करते हुए लगभग 25,500 नॉटिकल मील की दूरी तय की।
लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर के नेतृत्व में पूरा हुआ यह अभियान दुनिया का पहला ऐसा ट्राई-सर्विस, पूरी तरह महिला-केंद्रित समुद्री अभियान बताया जा रहा है। अभियान की सफलता के बाद मुंबई में महिला अधिकारियों के लौटने पर उत्साह और गर्व का माहौल रहा। इसे भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका, क्षमता और नेतृत्व का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। 314 दिनों तक समुद्र में जारी रहा सफर ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान के तहत महिला अधिकारियों ने लंबे समय तक समुद्र में रहकर कठिन परिस्थितियों का सामना किया। करीब 314 दिनों की इस यात्रा में उन्होंने हजारों नॉटिकल मील की दूरी तय की और दुनिया के प्रमुख समुद्री क्षेत्रों से होकर गुजरीं।
समुद्र में इतने लंबे समय तक यात्रा करना अपने आप में बड़ी चुनौती माना जाता है। बदलते मौसम, समुद्री लहरों, हवाओं और लंबे समय तक सीमित संसाधनों के बीच दल को लगातार अपने जहाज की दिशा और संचालन पर नजर रखनी होती है। इस अभियान में महिला अधिकारियों ने न केवल नौवहन संबंधी जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि टीमवर्क, अनुशासन और धैर्य का भी परिचय दिया। अभियान के दौरान चार प्रमुख महासागरों को पार करना इसकी खास उपलब्धियों में शामिल रहा। करीब 25,500 नॉटिकल मील की दूरी तय करने के बाद ‘त्रिवेणी’ का मुंबई लौटना इस अभियान की सफलता का प्रतीक बन गया।
तीनों सेनाओं की महिलाओं की भागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों की संयुक्त भागीदारी रही। तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों को एक साथ लेकर चलाया गया यह अभियान सशस्त्र बलों में संयुक्तता और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर ने अभियान का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में दल ने लंबी समुद्री यात्रा के दौरान विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए निर्धारित लक्ष्य हासिल किया।
इस अभियान ने यह भी दिखाया कि समुद्री अभियानों जैसे कठिन और तकनीकी क्षेत्रों में महिला अधिकारी किस तरह नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए लगातार नए अवसर खुलने के बीच इस तरह की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी की महिला अधिकारियों के लिए प्रेरणा का काम कर सकती हैं। पहले भी भारतीय महिलाओं ने रचा इतिहास भारतीय महिला अधिकारियों की समुद्री उपलब्धियों का सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले भी भारतीय नौसेना की महिला अधिकारियों ने दुनिया का चक्कर लगाकर इतिहास रचा है। पिछले साल मई में नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. ने भारतीय नौसेना के सेलिंग वेसल INSV ‘तारिणी’ पर सवार होकर दुनिया का चक्कर पूरा किया था। दोनों अधिकारियों ने करीब 239 दिनों तक समुद्र में रहते हुए 25,400 नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा की थी। उनका अभियान भी बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने बिना किसी बाहरी मदद के हवा से चलने वाले जहाज पर दुनिया का चक्कर लगाया। इस उपलब्धि के साथ वे ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिलाएं बनीं। 2017 में भी बना था इतिहास भारतीय नौसेना की महिला अधिकारियों ने इससे पहले भी समुद्री क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की थी। वर्ष 2017 में लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में नौसेना की छह महिला अधिकारियों की पूरी तरह महिला क्रू ने दुनिया का चक्कर लगाया था। यह अभियान भी करीब आठ महीने तक चला था। उस समय भारतीय नौसेना की महिला अधिकारियों की इस उपलब्धि को देश और दुनिया में व्यापक सराहना मिली थी। इसने समुद्री अभियानों में महिलाओं की भागीदारी के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया। अब ‘त्रिवेणी’ के जरिए नौ महिला अधिकारियों की 314 दिन की यात्रा ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया है। अलग-अलग सेवाओं की महिला अधिकारियों को एक साथ लेकर पूरा किया गया यह अभियान अपनी प्रकृति और पैमाने के कारण विशेष महत्व रखता है। महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका लगातार विस्तार पा रही है। युद्धक भूमिकाओं से लेकर तकनीकी, प्रशासनिक और नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों तक महिला अधिकारियों की भागीदारी बढ़ी है। समुद्री अभियानों में महिलाओं की लगातार उपलब्धियां इसी बदलाव का हिस्सा हैं। ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान को केवल एक समुद्री यात्रा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह शारीरिक और मानसिक दृढ़ता, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क तथा जोखिम के बीच निर्णय लेने की क्षमता की भी परीक्षा थी। नौ महिला अधिकारियों ने इस चुनौती को स्वीकार कर इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा ‘त्रिवेणी’ की इस ऐतिहासिक यात्रा की सफलता भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने की तैयारी कर रही युवतियों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। यह उपलब्धि संदेश देती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रशिक्षण और टीमवर्क के जरिए बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।